गहरा हुआ ‘DVC- JBVNL’ का विवाद, झारखंड सरकार त्रिपक्षीय समझौते से हुई बाहर
रांची: झारखंड के त्रिपक्षीय समझौते से बाहर निकलते ही DVC ने बकाया राशि भुगतान को लेकर नया दांव खेला है. यह दांव लेटर ऑफ क्रेडिट को इन्वोक करने को लेकर है. अब JBVNL को DVC से बिजली लेने के लिये नये लेटर ऑफ क्रेडिट की जरूरत होगी. इतना ही नहीं DVC ने झारखंड के बिजली उपभोक्ताओं पर डोरे डालने भी शुरू कर दिए हैं. DVC ने उसका कंज्यूमर बनने पर निर्बाध बिजली आपूर्ति का प्रलोभन दिया है.
झारखंड में DVC के साथ JBVNL का विवाद समय के साथ और गहराता जा रहा है. DVC के द्वारा लेटर ऑफ क्रेडिट को इन्वोक किये जाने के बाद भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है. एक तरफ DVC ने बकाया राशि भुगतान को लेकर कमांड एरिया में बिजली कटौती शुरू कर दी है, तो दूसरी तरफ त्रिपक्षीय समझौता से झारखंड सरकार ने खुद को अलग करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
एक अप्रैल 2020 तक DVC का JBVNL पर बकाया 5209 करोड़ के करीब था. मासिक बिल प्रति माह 160 से 180 करोड़ के आस-पास रहा है. DVC की बकाया राशि भुगतान नहीं होने के बाद त्रिपक्षीय समझौता का हवाला देते हुये केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के खाते से 1417 करोड़ रुपये अक्टूबर माह में काट लिया था.
केंद्र सरकार द्वारा राशि की इस कटौती ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया. फिर दूसरी कटौती का समय नजदीक आते ही राज्य सरकार ने खुद को त्रिपक्षीय समझौता से अलग कर लिया.
DVC के इस कड़े रुख को लेकर सूबे की राजनीति भी गर्म है. सत्ताधारी दल का आरोप है कि पिछली रघुवर दास सरकार में बकाया राशि की वसूली के लिये DVC की गंभीरता नहीं दिखी. अब DVC कोरोना संक्रमण के इस काल में बकाया राशि वसूली के साथ-साथ बिजली कटौती पर भी अड़ी है.
DVC के कड़े रुख ने राज्य के 7 जिलों में बिजली संकट जैसे हालात पैदा कर दिये हैं. दिन बीतने के साथ बिजली की कटौती की समयसीमा भी बढ़ती चली जाएगी. JBVNL फिलहाल इस क्राइसिस मैनेजमेंट पर काम करने में जुटी हुई है, पर ये इतना आसान नहीं है, क्योंकि मामला 600 मेगावाट बिजली कटौती का है. DVC के द्वारा शत प्रतिशत बिजली कटौती के बाद 7 जिलों में अंधेरा छा जाएगा.

