रांचीः गोड्डा जिले की स्वास्थ्य विभाग मैं एक करोड़ 53 लाख रुपए का गबन सन 2004-05 ,2005-06,एवं 2006-07 में हुआ है. जिसका fir भी विभाग के द्वारा 3 वर्ष के बाद 2011 में गोड्डा जिले के सुंदर पहाड़ी थाना में दर्ज हुआ . 18/07/2012 को वारंट जारी हुआ. 07/09/2012 को घर में कुर्की हुई. 17/02/2018 को केस बंद कर स्थाई वारंट जारी हुआ.इन दिनों जामताड़ा के नारायणपुर प्रखंड में आराम से नौकरी कर रहे हैं .

क्या है मामला
गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी प्रखंड का है . इस प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुंदरपहाड़ी तथा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डमरूहाट के तत्कालीन चिकित्सा लिपिक सुनील कुमार मंडल पर दवा खरीदने में गड़बड़ी करने के साथ ही विभागीय राशि का अवैध निकासी का आरोप है. इन्होंने सुंदरपहाड़ी में रहते हुए उक्त वित्तीय वर्ष के दौरान कोषागार से राशि की निकासी की गई थी जिसे विभाग के खाते में नहीं दिखाया गया था. इस दौरान 1 करोड़ 53 लाख 32 हजार 335 रुपए निकाले गए थे . मामला सामने आने के उपरांत विभागीय स्तर पर जांच करायी गई . लेकिन लंबे समय तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई. बाद में महालेखाकार रांची स्तर से गड़बड़ी को उजागर किया गया . इसके बाद विभागीय पदाधिकारी से सक्रिय हुई और सुनील कुमार मंडल को निलंबित किया गया. वेतन पर भी रोक लगी. लेकिन निलबंन के बाद भी दुबारा नौकरी मिली. निलंबन के बाद भी सुनील कुमार मंडल को नौकरी करने का मौका भी मिल गया. उसके बाद गोड्डा से स्थान्तरण जामताड़ा कर दिया. इन दिनों वह नारायणपुर प्रखंड में कार्यरत है. पुलिस की डायरी 26/09/2012 को भी इसकी पुष्टि की है . जबकि गोड्डा न्यायालय व प्रशासन की नजरों में सुनील कुमार मंडल फ़रार हैं. जबकि आमजनों की नजरों में जामताड़ा स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं. आखिर एक ही प्रदेश एक ही कानून व्यवस्था में ऐसी घटना देखकर आम जनता के सरकार एवं कानून व्यवस्था के प्रति असन्तोषता व्याप्त हैं .

आरोपी को मिली लूट की छूट
आदिवासी बाहुल क्षेत्र सुंदरपहाड़ी में स्वास्थ्य विभाग के 1.53 करोड़ रुपये ग़बन के मामले में हर स्तर पर लापरवाही होने की बात सामने आई है. क्योंकि इस राशि का गबन एक बार नहीं बल्कि तीन वित्तिय वर्ष के दौरान किया गया है. विभाग स्तर पर भी इस मामले का खुलासा नहीं हुआ. बल्कि महालेखाकार रांची के ऐसे ऑडिट में पकड़ा गया था
क्या कहती हैं पुलिस की डायरी?
अब तक 124 बार पुलिस डायरी लिखा जा चुका हैउक्त आरोपी के विरुद्ध अनुसंधान में प्रशासन एवम विभाग लाखो सरकारी राशि का दुरुपयोग कर चुकी हैं. एक तरफ जहां प्रशासन दर्जनों बार गोड्डा में छापेमारी की बात अंकित है और आरोपी हाथ मे नही लगती जब कहा जाता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं.दूसरी ओर आरोपी आराम से जामताड़ा के व नारायण पुर प्रथमिकता स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं.जबकि पुलिस डायरी 26/09/2012को नारायणपुर में पदस्थापना का जिक्र किया है.




