नई दिल्ली: कोरोना संकट और उसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन से नौकरीपेशा लोगों की समस्या भी बढ़ गई है और वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. कई क्षेत्रों में कर्मचारियों के वेतन में कटौती, पारितोषिक में सालाना वृद्धि नहीं होना तथा नौकरी जाने की आशंका ने समस्या बढ़ा दी है. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों का उत्साह बनाए रखने को लेकर विभिन्न उपायों पर गौर कर रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संकट ने कर्मचारियों के साथ-साथ संगठनों के ऊपर काफी दबाव लाया है.
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देशव्यापी बंद जल्दी खत्म होता दिखाई नहीं देता, इस कारण कर्मचारियों के लिए संवेदनात्क चुनौतियां कई गुना बढ़ गई हैं. जानकार सुदीप सेन ने कहा, निश्चित रूप से कुछ चिंता है क्योंकि यह ऐसी स्थिति है जिसका सामाना संगठनों समेत हममें से किसी ने नहीं किया. सालाना वेतन वृद्धि के संदर्भ में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. क्योंकि कोरोना का नियोक्ताओं के साथ-साथ कारोबार पर असर पड़ा है.’ उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, खाद्य सेवाएं और महत्वपूर्ण विनिर्माण से जुड़े कुछ काम धंधे अभी खुले हैं. उन क्षेत्रों में कर्मचारी अभी भी कार्यस्थल पर जाकर काम कर रहे हैं. उनमें उन लोगों के मुकाबले तनाव अलग होगा जो घर से काम कर रहे हैं.
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कई कंपनियों को सेवा दे रही मनोवैज्ञानिक साक्षी मानध्यन ने कहा कि जब हम अनिश्चित भविष्य के बारे में सोचते हैं, चिंतित होते हैं. अगर हम मौजूदा स्थिति की बात करें, कई लोगों ने वेतन में सालाना ‘इन्क्रीमेंट’ के रूप में वृद्धि के आधार पर अप्रैल और आने वाले समय के लिये योजनाएं बनायी होंगी. लेकिन दुर्भाग्य से ये चीजें नहीं हो रही हैं. उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसी बात को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए जो उनके नियंत्रण से बाहर है. बजाए इसके जो उनके हाथ में है, वह करना चाहए और उसमें बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए.

