रांची: राज्य सरकार ने पथ निर्माण विभाग के प्रभारी अभियंता प्रमुख रास बिहारी सिंह, सह मुख्य अभियंता केंद्रीय निरूपण संगठन पथ निर्माण विभाग को निलंबित कर दिया है. इस संबंध में पथ निर्माण विभाग द्वारा शनिवार को अधिसूचना जारी कर दी गयी है.
पथ निर्माण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सूरत की यूनिक कंस्ट्रक्शन कंपनी को 51.82 करोड़ रुपये का कार्य आवंटित किया गया. संवेदक को सितंबर 2019 तक 7.65 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया, जिसमें से चार करोड़ रुपये का मोबालाइजेशन एडवांस भी शामिल है.
अंकेक्षण रिपोर्ट में इस योजना के संबंध में गंभीर आपत्तियां सामने आयी. इस कार्य की धीमी प्रगति के कारण अभियंता प्रमुख द्वारा 11 सितंबर 2019 द्वारा जारी आदेश में संवेदक को डिबार कर नोटिस भेजा गया, लेकिन कंपनी की ओर से विभाग को सूचित किया गया कि उनके द्वारा राज्य में कोई कार्य नहीं किया जा रहा है और न ही उन्होंने पथ निर्माण विभाग से कोई अग्रिम राशि ही ली है. साथ ही कंपनी द्वारा इस कार्य के जांच का भी आग्रह किया गया.
परंतु इस दिशा में अब तक कोई अपेक्षित परिणाम नहीं हुआ. इससे स्पष्ट है कि इस कंपनी के नाम से फर्जी कागजात के आधार पर किसी ने निविदा डाला. कार्यादेश पाया तथा मोबाइलाजेशन एडवांस भी प्राप्त किया. सरकारी राशि के गबन का यह एक अदभूत उदाहरण है.
विभाग द्वारा कहा गया है कि निविदा समिति के अध्यक्ष और विभाग के तकनीकी प्रमुख एवं नियंत्रक के रूप में रास बिहारी सिंह, प्रभारी अभियंता प्रमुख पथ निर्माण विभाग अपने वर्तमान कार्य में असफल रहे हैं तथा इनकी विफलता/गलत निर्णय के कारण सरकार को बड़ी धनराशि का नुकसान हुआ है.
निलंबित रास बिहारी सिंह पर पीडब्ल्यूडी कोड के कई नियमों की अवहेलना का भी गंभीर आरोप है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है और इस दौरान उन्हें झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2016 के नियम 10 के तहत निलंबनावधि में मात्र जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा और उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने के लिए निमित्त प्रपत्र क अलग से निर्गत किया जा रहा है.

