निवास शर्मा,
बिहार(ठाकुरगंज): कहने को तो ठाकुरगंज नगर को नगर पंचायत का दर्जा मिले करीब 20 साल होने जा रहें हैं. 15 वर्षो तक नवीन यादव और बेबी देवी वाली एक पक्ष की सरकार रहीं. 15 वर्षो के बाद परिवर्तन मंच के रूप में सत्ता परिवर्तन हुआ. इसके बाद परिवर्तन में महापरिवर्तन भी हुआ. लेकिन, नगरवासियों को अबतक पार्किंग की सुविधाएं नहीं मिल पाई. पार्किंग की सुविधा से वंचित नगर में इस अवधि में नगर की आबादी भी काफी बढ़ी है. आबादी में बढ़ोत्तरी व वाहनों की संख्या में दिन प्रतिदिन हो रहे इजाफा के बीच शहरी इलाके में पार्किंग की व्यवस्था में कोई भी बदलाव नहीं हो सका है.
लंबी अवधि बीतने के बाद भी शहर में एक भी स्थायी पार्किंग की व्यवस्था नहीं हो सकी है. जो काफी दुःखद समस्या और चिंतनीय विषय बन चुकी हैं. एक-दो स्थान पर पार्किंग के लिए अस्थायी स्थानों का चयन किया भी गया तो वहां जगह का अभाव एक बड़ी समस्या है. डीडीसी मार्केट, बस स्टैंड, महावीर स्थान, अस्पताल चौक आदि मुख्य है. ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसे में अपने काम से शहर में आने वाले लोगों को वाहन खड़ी करने के लिए स्थान की तलाश करना किसी मुसीबत से कम नहीं है. पार्किंग के लिए नगर पंचायत में उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग अपने वाहन को मुख्य पथों के किनारे ही खड़ी करने को विवश होते हैं.
कई रहिश जादो का तो सड़को पर चार पहिया और दो पहिया वाहन खड़े होते हैं।ऐसे में दिन के दस बजते-बजते शहर का अधिकांश हिस्सा प्रत्येक हाट के दिन जाम की चपेट मे आने लगता है. यह समस्या सिर्फ एक दिन की नहीं है. प्रत्येक दिन लोग इसी समस्या से जूझते हैं. हालांकि, किशनगंज पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष के पहल के बाद ठाकुरगंज सर्किल इंस्पेक्टर औऱ थानाध्यक्ष को निर्देश दिये जाने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों के बातचीत करने के बाद पुलिस चौक पर नियुक्ति के बाद भीषण जाम में मुक्ति मिल पाई है. लेकिन, मूल समस्या के समाधान की दिशा में अबतक कोई भी प्रयास नहीं किया गया है. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि इस समस्या के स्थायी समाधान निकले. रोजाना लोगों को शहर की छोटी-छोटी गलियारों का सहारा लेना पड़ रहा है. जबकि, सोमवार और शुक्रवार का दिन किसी नरकीय हालत से कम नही दिखता है मुख्य बाजार के शहर की.

