“मानो तो मैं गंगा मां हूं, ना मानो तो बहता पानी”
यह एक बहुत ही मशहूर गाना है अगर आप इसकी लाइनों को गौर से सुनेंगे तो यह सच लगता है कि मानो तो बहुत कुछ है, ना मानो तो कुछ भी नहीं.
कभी-कभी कुछ ऐसी बातें हो जाती है जो विश्वास नहीं होता पर होता है. इस संसार में कुछ भी हो सकता है. ऐसे ही हमारे एक अंकल थे चुकी वह मारवाड़ी थे तो हम सब उनको मारवाड़ी अंकल ही कहते थे और आंटी को मारवाड़ी आंटी. अंकल कुल दस भाई बहन थे, अपने घर में सबसे बड़े थे जाहिर था कि उनको पूरे परिवार को देखना पड़ता, तो आंटी भी बहुत अच्छी थी उन्होंने हमेशा अंकल का साथ दिया. थोड़ा-थोड़ा बजत कर के घर को अच्छे से चलाते हुए आंटी अंकल ने सभी की शादी कर दी. परिवार में ख़ुद उनके पांच बच्चे थे. आंटी हम सभी को बहुत कुछ सिखाया करती. कम पैसों में भी आप अच्छे से घर को चला सकते हैं उस समय उनकी बातें हम सबको समझ नहीं आती थी, पर धीरे-धीरे समय आने पर समझ आने लगती है.
अंकल आंटी भी एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे उनका रोज का नियम था शाम को कहीं भी घूमने जाना ही जाना, शायद ही कोई ऐसा दिन होगा जो वह नहीं जाते.
कॉलोनी में भी उन लोगों की खूब चर्चा होती सभी कहते थे जोड़ी हो तो ऐसी दोनों एक दूसरे के पूरक लगते थे. अगर आंटी 2 दिन के लिए भी मायके चली जाती तो अंकल उनको वापस ले आते.
उन लोगों को देखकर हर कोई कहता की जोड़ी हो तो ऐसी,
एक दिन अचानक अंकल की तबीयत खराब हो गई आंटी उनको लेकर भेलूर चली गई, वहां पता चला माइल्ड ऑटोटेक था और डायबिटीज भी था डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी. आंटी की तो सारी दुनिया ही सिमट गई थी. उन्होंने एक मिनट भी अंकल को अकेला नहीं छोड़ा. इतना ध्यान रखा कि अपनी सेहत को नजरअंदाज कर दिया. एक दिन आंटी चक्कर खाकर गिर गए और बेहोश हो गई. उनको सभी ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया वहां डॉक्टर ने कहा,इनको वेल्लोर ले जाना होगा. वहां पता चला आंटी को ब्रेन ट्यूमर था.
अब आंटी ज्यादा सीरियस हो गई थी इसे आप क्या कहेंगे ना तो अंकल कभी बीमार पड़े और ना आंटी कभी बीमार पड़ी. बीमार पड़े भी तो एक साथ, पता नहीं भगवान की यह कैसी लीला थी धीरे-धीरे आंटी बातों को भूलने लगी थी कभी किसी के घर जाती तो घंटों बैठी रहती घर जाने का होश नहीं रहता था. फिर अंकल उन को खोजते हुए आते और लेकर जाते. कभी कभी हमारे घर भी आया करते थी चार-पांच घंटे तक बैठी रह जाती फिर अंकल ले जाते. डॉक्टर ने जल्द से जल्द ऑपरेशन के लिए कह दिया क्योंकि लेट करना ठीक नहीं था धीरे-धीरे बीमारी बढ़ती जा रही थी.
अंकल भेलूर लेकर चले गए और उनका ऑपरेशन करवा दिया. हर चार महीने में थेरेपी कराना पड़ रहा था, पर आंटी की तबीयत दिनों-दिन खराब होते जा रही थी. और अंकल को भी समझ नहीं आ रहा था जिसने दूसरों की इतनी सेवा कि आज उनकी हालत खराब हो रही थी. जिसने कभी भी दुख में किसी से मदद नहीं ली और सबका एक साथ ध्यान रखा आज उनको ही इतना कष्ट, इसलिए कहते हैं कि भगवान की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता. आखिर भगवान उनकी क्यों इतनी परीक्षा ले रहा था देखते-देखते आंटी की हालत और बिगड़ गई फिर एक दिन वह भी आया जब इस संसार से विदा हो गई. आंटी के जाते ही अंकल बेचैन हो गए.
अगले दिन सुबह देर तक सोते रहे उठे ही नहीं अंकल की बहन ने कहा येे देर तक तो सोता नहीं है जरूर कोई बात है , जब उनकी बहू ने उठाया तो वह उठ नहीं पाए जल्दी से लेकर उनको अस्पताल पहुंचे पता चला पैरालिटिक अटैक था देखते देखते वह भी इस संसार से विदा हो गए.
लोग आश्चर्यचकित रह गए कहने लगे रहे तो जिंदगी भर साथ रहे. गए तो भी एक साथ, एक दूसरे के बिना नहीं रह पाए. ऐसा भी होता है दोनों की प्रेम कहानी अद्भुत थी.
शायद इसलिए कहते हैं कि मानो तो बहुत कुछ है ना मानो तो कुछ भी नहीं आज उन लोगों को गए हुए लगभग 15 साल से भी ऊपर हो गया होगा,
लेकिन लोग ऐसी जोड़ी को आज भी याद करते हैं और कहते हैं ऐसी जोड़ी बिरले ही पाई जाती है ,जो पति पत्नी एक प्रेम का मिसाल छोड़ गए थे. ऐसी पति पत्नी को शत-शत नमन.


