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100 साल पहले भी महामारी के दौरान तानाशाही ताकतों का रवैया आज के ही जैसा था: रामेश्वर उरांव

by bnnbharat.com
September 30, 2020
in समाचार
रामेश्वर उरांव ने शहीद जवान कुलदीप उरांव की शहादत को किया नमन
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रांची: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा देश की धरोहर का 14 वा श्रृंखला आज जारी हुआ है, जिसमें महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के बाद अहमदाबाद में सूती वस्त्र के मशहूर मिल अंग्रेज मालिकों और मजदूरों के बीच एक संघर्ष पर यह आधारित एपिसोड है.

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह वित्त व खाद आपूर्ति मंत्री डॉक्टर रामेश्वर उरांव ने कहा है कि गांधी जी के चंपारण सत्याग्रह के बाद अहमदाबाद में सूती वस्त्र के मिल मालिक और  मजदूरों में उस वक्त संघर्ष उत्पन्न हुआ. जब 1917 में प्लेग जैसी महामारी फैला हुआ था मिल मालिकों ने मजदूरों का बोनस देना बंद कर दिया था.  मजदूर  50 प्रतिशत भत्ते के लिए  संघर्ष कर रहे थे. मजदूरों का साथ देने के लिए  गांधी जी ने  इस आंदोलन  की अगुवाई की.

महात्मा गांधी का यह भारत में चंपारण के बाद दूसरा आंदोलन था. गांधी जी ने मजदूरों से बात कर 35 प्रतिशत  भत्ता देने के लिए अंग्रेजो के खिलाफ  आंदोलन शांति पूर्वक छेड़ दिया.  गांधी जी का यह आंदोलन पहला भूख हड़ताल आंदोलन था.  यह लगभग 25 दिन तक चला.  आखिरकार 35 प्रतिशत भत्ते पर  मजदूर और अंग्रेज मालिक दोनों मान गए और आंदोलन समाप्त हुआ.

डॉ रामेश्वर उरांव  ने कहा कि आज से लगभग 100 साल पहले भी महामारी के दौरान तानाशाही ताकतों का रवैया आज ही जैसा था तब गांधी जी के नेतृत्व में मजदूर ब्रिटिश हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. मजदूर किसान वाली एकता आज भी जिंदा है.  उन्होंने कहा कि जिस तरह से आज केंद्र सरकार ने कोरोना की आड़ में किसानों के खिलाफ कानून बनाया है उसे देश के किसान माफ उसी तरह नहीं करेंगे जैसे 100 साल पहले अहमदाबाद के सूती वस्त्र मिलों में काम कर रहे मजदूरों ने ब्रिटिश हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.

देश का किसान केंद्र सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर गया है. हर वर्ग का किसानों को साथ मिल रहा है. इस मजबूती के आगे केंद्र सरकार को घुटने टेकने ही होंगे. सरकार बेहतर पॉलिसी से चलती है ना कि तानाशाही रवैया से. केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया पिछले कई सालों से देश की जनता देख रही है.  जिस तरह ब्रिटिश हुकूमत ने इस देश में  मजदूरों, किसानों, गरीबों पर जुल्म किया था आज उसी अंदाज में केंद्र की  दमनकारी  सरकार काम कर रहे है.

देश की जनता ने 100 साल पहले भी दमनकारी पॉलिसी को बर्दाश्त नहीं किया था और आज भी किसान विरोधी कानून को बर्दाश्त नहीं करेगी. कांग्रेस पार्टी हमेशा से गरीब मजदूर किसान के साथ कदम से कदम मिलाकर उनके संघर्षों में शामिल रही है और आज भी किसान विरोधी बिल के खिलाफ कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत के साथ पूरे देश में आंदोलन कर रहे किसानों का आंदोलन को गरीब मजदूर नौजवान महिलाएं सभी का समर्थन हासिल है इसलिए एक बार फिर ब्रिटिश सरकार के अंदाज में चल रही केंद्र सरकार को किसानों के सामने घुटने टेकने पड़ेंगे.

कांग्रेस विधायक दल के नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा है कि ब्रिटिश हुकूमत ने हमारे  देश में हुकूमत के दौरान ना जाने कितने किसानों मजदूरों को सताया है. इसका अंदाजा लगाना बहुत कठिन है. जब भारत के लोग राम जी के नेतृत्व में एक सूत्र में बध कर ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने लगे तो अंग्रेजों को भी अंदाजा हो गया कि अब वह दिन दूर नहीं की भारत छोड़कर बरतानिया जाना पड़ेगा. यह ताकत मजदूरों की ताकत थी. किसानों की ताकत थी, नौजवानों की ताकत थी ,महिलाओं की ताकत थी.  जब सारी  ताकतें  एक हो जाए तो अच्छे-अच्छे  तानाशाह को घुटने टेकने पड़ते हैं. देश की आज की हालात भी ब्रिटिश शासन की तरह ही है जब पार्लियामेंट शुरू होता है. सदन में बगैर चर्चा किए हुए अपनी हठधर्मिता  से सदन में कोई भी बिल को यह सरकार पास करा लेती है जो घोर निंदनीय है लेकिन इस सरकार को किसानों मजदूरों नौजवानों  के आगे झुकना पड़ेगा.

देश की धरोहर के 14 वें एपिसोड को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर करने वालों में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के  प्रवक्ता  आलोक कुमार दूबे, किशोर नाथ शाहदेव, राजेश गुप्ता छोटू, डॉ एम तौसीफ, आभा सिन्हा, डॉ राकेश किरण महतो, अमूल नीरज  खलखो सोशल मीडिया के को ऑर्डिनेटर गजेंद्र सिंह मुख्य रूप से शामिल हैं.

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