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ब्रिटिश हुकूमत में भी कांग्रेस ने काले कानून का विरोध किया था: रामेश्वर उरांव

by bnnbharat.com
October 11, 2020
in समाचार
रामेश्वर उरांव ने शहीद जवान कुलदीप उरांव की शहादत को किया नमन
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रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह खाद्य आपूर्ति एवं वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के काले कानून के खिलाफ शुरू हुई लड़ाई, जिसने अंग्रेज राज को घुटनों पर ला दिया. अत्याचार और तानाशाही के खिलाफ लड़ना भारत की अनमोल धरोहर है, समय-समय पर अत्याचार ताकतें इस धरोहर की परीक्षा लेती हैं हमें हर परीक्षा में सफल होना है.

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा रामेश्वर उरांव आज राष्ट्र निर्माण की अपने महान विरासत कांग्रेस की श्रृंखला धरोहर की सत्रहवीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक एवं ट्विटर पर जारी पोस्ट को शेयर करने के उपरांत मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे. उन्होंने कहा भारत में काला कानून लाने की शुरुआत ब्रिटिश हुकूमत ने की थी और वर्तमान दौर में भी ब्रिटिश हुकूमत जैसे काले कानूनों से देश जूझ रहा है. मगर यह देश किसी भी काले कानून के सामने आज तक झुका नहीं, देशवासियों ने हमेशा लंबी और घनघोर लड़ाई लड़ी.

1919 का साल था देश में लगातार बढ़ती क्रांतिकारी गतिविधियों एवं तेज होती आजादी की लौ से ब्रिटिश हुकूमत भयभीत हो रही थी. आजादी के दीवानों को कमजोर करने की साजिश ने ही रौलेट एक्ट को जन्म दिया, इस एक्ट का मतलब था ब्रिटिश हुकूमत बिना मुकदमा चलाए किसी भी भारतीय को जेल में बंद कर सकती थी,उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार खत्म कर दिया गया.

ब्रिटिश हुकूमत इस कानून के जरिए प्रेस की स्वतंत्रता कुचल सकती थी, दरअसल इस काले कानून की आड़ में ब्रिटिश हुकुम आजादी के आंदोलन को कुचलना चाहती थी, मगर आजादी के मतवाले कहां डरने वाले थे. इस काले कानून के विरोध में देशव्यापी हड़तालें जुलूस और प्रदर्शन होने लगे.कांग्रेस नेता मदन मोहन मालवीय जी ने केंद्रीय व्यवस्थापिका के सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया. गांधी जी ने मुंबई में सत्याग्रह सभा का आयोजन किया और राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया.

पूरे देश में इस काले कानून के खिलाफ गुस्सा चरम पर था. ब्रिटिश हुकूमत चाहकर भी भारतीयों के हौसले और इरादे नहीं तोड़ पा रही थी. 9 अप्रैल 1919 को सैफुद्दीन किचलिऊ जी और डॉक्टर सतपाल जी को ब्रिटिश हुकुमत ने बिना किसी कारण के गिरफ्तार कर लिया. 10 अप्रैल को इस गिरफ्तारी के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. पंजाब में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और कमान थमा दी जनरल डायर को, वही डायर  जिसने जलियांवाला बाग नरसंहार को अंजाम दिया.उस क्रूरता को शब्दों में बयां करना मुश्किल है लेकिन अगले एपिसोड में हम इस नरसंहार के पीछे छिपी मानसिकता और काले कानून के ध्वस्त होने का संघर्ष जानेंगे.

कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम ने कांग्रेस की धरोहर सत्रहवीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक ट्विटर व्हाट्सएप इंस्टाग्राम पर जारी करते हुए कहा कि की रॉलेट एक्ट जिसे काला कानून भी कहा जाता है,ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया गया था.यह कानून सर सिडनी रोलेट की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाया गया था इस कानून से ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए उसे जेल में बंद कर सकती थी, लेकिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशवासियों ने बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान किया था आज भी इस प्रकार के कानून का विरोध करने के लिए कांग्रेसजन पूरी ताकत के साथ तैयार खड़े हैं

झारखंड सरकार में कांग्रेस के मंत्री बादल पत्रलेख एवं बन्ना गुप्ता ने धरोहर वीडियो को जारी करते हुए कहा कहा कि इस कानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले का नाम जानने का भी अधिकार नहीं था, इस कानून का पूरे देश में जमकर विरोध हुआ अमृतसर के 2 बड़े सामाजिक नेता डॉक्टर सतपाल और डॉक्टर सैफुद्दीन गिरफ्तार कर लिया गया,तब अमृतसर सहित पूरे पंजाब में लोगों में रोष फैल गया, 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी वाले दिन पंजाब के किसान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में एकत्रित हुए थे जिनमें लोगों पर गोलियां बरसा दी थी इस घटना को ब्रिटिश भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन माना  जाता है विस्तृत चर्चा हम अगले एपिसोड में करेंगे.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव एवं डॉ राजेश गुप्ता छोटू ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से धरोहर वीडियो की सत्रहवीं कड़ी को झारखंड की जनता के नाम समर्पित करते हुए कहा कि आज जालियांवाला बाग हत्याकांड को एक सौ साल पूरे हो गए, 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में रौलट एक्ट के विरोध में हजारों लोग एकत्र हुए थे ,अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने इस बाग के मुख्य द्वार को अपने सैनिकों और हथियारबंद वाहनों से रोककर निहत्थी भीड़ पर बिना किसी चेतावनी के 10 मिनट तक गोलियों की बरसात कराई थी. 

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आदित्य विक्रम जयसवाल,निरंजन पासवान,सुखेर भगत,चैतू उराँव,अमरेन्द्र कुमार सिंह, सन्नी टोप्पो,बेलस तिर्की, फिरोज रिजवी मुन्ना,देवजीत देवघरिया, सोनी नायक,जितेन्द्र त्रिवेदी, विनीता पाठक,विभय शाहदेव, सहित पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, विधायक ,सांसद, मंत्रियों ने धरोहर वीडियो को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के समक्ष प्रेषित किया है जो काफी ट्रेंड कर यहा है.

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