नीता शेखर,
रांची: हंसती खेलती जिंदगी में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता. यह एक ऐसा सच है जिसका सामना सभी को करना पड़ता है.
यह कहानी एक सच्ची कहानी है, पंखुड़ी और अमर की. दोनों ने काफी मुसीबतों को झेल कर प्रेम विवाह किया था उनकी प्रेम की गवाह थी उनकी बेटी नैना जो बिल्कुल उनके नैनों में बसी रहती थी. पंखुड़ी और अमर ने विदेश में जाकर अपनी गृहस्थी बसा ली थी. पंखुड़ी ने भी वही किसी स्कूल में नौकरी कर ली थी. उनकी जिंदगी आराम से चल रही थी तभी अचानक उनकी जिंदगी में एक तूफान ने करवट ली और उस तूफान में पंखुड़ी की किस्मत बिगड़ गई.
देखते ही देखते उसकी गृहस्थी उजड़ गयी. वो पूरी बर्बाद हो गई थी. उनके जीवन में आग लग गई थी. मृत्यु किसी एक की होती है पर असर पूरे परिवार पर पड़ता है. इससे कोई भी अछूता नहीं रहता है. पंखुड़ी के पास उसकी बेटी के अलावा कुछ भी नहीं बचा था. जब किसी बेटी की गृहस्थी उजड़ जाती है तब उसका असर पूरे परिवार को हिलाकर रख देता है.
पंखुड़ी भी अपनी बेटी के साथ मां पापा के घर वापस आ गई थी. अब उसने नौकरी की तलाश शुरू कर दी थी. वह जिस भी स्कूल में जाती, फिर से पूरी कहानी दोहराई जाती, फिर भी नौकरी नहीं मिल पाती थी. अमर की मृत्यु की कहानी सुनाते सुनाते दिल जार जार हो जाता था. यह कैसी विडंबना है. समाज ही औरत की दुश्मन होती है. काफी जद्दोजहद के बाद आखिर में नौकरी मिल गई थी.
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जिस घर में पहले चहल-पहल रहा करती थी वहां अब उदासी की परत पड़ गई थी. मां बाप भाई बहन दिन-रात इसी चिंता में रहते कैसे कटेगी पूरी ज़िंदगी. सबसे ज्यादा असर उसकी दीदी पर पड़ा था. तबीयत बहुत खराब रहने लगी वह हर समय यही सोचती रहती उसकी बहन और नैना कैसे रहेंगे. उसे हर समय अमर का चेहरा दिखाई देता, जैसे कह रहा, दीदी मैं आपके भरोसे छोड़कर जा रहा हूं. आप इनका ख्याल रखना. उसकी दीदी को आईसीयू का चेहरा याद आ जाता जब वह वहां पहुंची तो अमर की आंखों से आंसू का एक बुंद टपक पड़ा था जैसे कह रहा है दीदी आप मेरे परिवार का ख्याल रखना.
यह बातें उसे दिन रात खाए जा रही थी जब भी. वह अपनी बहन और नैना का चेहरा देखती. उसे यही लगता आखिर ऐसा क्यों हुआ? उन्होंने इतने प्यार से अपने गृहस्थी को सजाया था. पल भर में वह खत्म हो गया. एक तूफान ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया था. एक छोटी सी मासूम सी बच्ची का क्या कसूर था. उसे तो यह भी नहीं पता था उसके पापा इस दुनिया में नहीं है. बार-बार वह यही कहती. कब जाएंगे पापा के पास पर किसी के पास उसका जवाब नहीं होता था. बस सबकी आंखें भर आया करती थी.
अब सभी धीरे-धीरे सामान्य होने की कोशिश करने लगे तभी अमर के जीजाजी पंखुड़ी के लिए रिश्ता लेकर आ गए थे. इस छोटी सी उम्र के साथ यह अपना जीवन कैसे गुजारेगी. पंखुड़ी शादी के लिए तैयार नहीं हो रही थी. काफी समझाने बुझाने के बाद वह तैयार हो गई. अब फिर से उसकी शादी हो गई. इस शादी से उसे बेटा भी मिल गया. अब उसका परिवार पूरा हो चला था. नैना को भी पापा मिल गए.
अभी भी इस धरती पर कुछ लोग ऐसे हैं जो इंसानियत के लिए कुछ भी कर गुजरने के पीछे नहीं रहते हैं. वह हमेशा किसी भी मदद के लिए तैयार रहते हैं. नैना की जिंदगी में पिता का प्यार मिल गया. सचमुच ऐसे इंसान से पंखुड़ी की शादी हुईं जिसने दोनों को अच्छे से अपना लिया. आज सबसे ज्यादा खुश तो नैना है. आधी रात को उसकी डिमांड को पूरी करने के लिए तैयार रहते हैं. आज फिर से सब हंसी खुशी से रह रहे हैं.
जिंदगी भी कभी-कभी क्या गुल खिलाती है. एक पल में पूरी दुनिया बदल जाती है. कहते हैं अंत भला तो सब भला पर एक की मौत सभी की जिंदगी को पलट कर रख देती है. आज उसकी दीदी भी खुश है उसे लगता है अमर ने जो जिम्मेदारी उस को सौंपी थी उसने उसे पूरा कर दिया है.


