रांची:- भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा देश के समक्ष वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट पेश किया गया. केन्द्र सरकार द्वारा लगातार कहा जा रहा था कि ये सरकार गांव, गरीब और किसानों की है, लेकिन इस बजट में न गांवों के लिए कोई योजना है, न गरिबों के लिए कोई राहत या केन्द्र सरकार के गलत नीति निर्धारण के कारण सड़क पर अपने हक के लिए लड़ रहे किसानों के लिए कोई राहत दिखाई देती है. किसानों की सुविधाओं में कमी की गई साथ ही मनरेगा आवंटन में भी कमी की गई है. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरल, पुदुचेरी जैसे राज्य जहां निकट समय में विधान सभा चुनाव होने हैं केवल उन्हीं राज्यों में निवेश की घोषणा की गई है, मतलब केवल वोट की राजनीति की गई है. यह बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पाण्डेय ने बजट को लेकर कही.
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों के बजट घोषणा में भी चुनाव होने वाले राज्यों में विशेष निवेश या योजनाओं को स्वीकृती दी गई थी, लेकिन उसका क्या हुआ हम सभी को पता है. कोरोना महामारी के बाद आने वाले देश के पहले बजट से आम लोगों को जो उम्मीदें थी, वो धराशायी हो गई हैं.
विनोद कुमार पाण्डेय ने कहा उंची दुकान-फिकी पकवाने वाले वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में सपने तो दिखाए गए, लेकिन उन्हे पुरा कैसे किया जाएगा इसका कोई उल्लेख नहीं है. कुल मिला कर यह बजट आम लोगों के जेब से पैसा निकाल कर खास लोगों को लाभ पहुंचाने वाला बजट है. उन्होंने इस बजट पर अपना विरोध जाहिर करते हुए इस बजट की निंदा की है.
