रांची : रांची की मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि नगर निगम के माध्यम से जनहित में किए जा रहे कार्यों के प्रति वह हमेशा समर्पित भाव से कार्य करती रही हैं, परंतु इन दिनों नगर आयुक्त मुकेश कुमार के व्यवहार व कार्यशैली से उनकी विश्वसनीयता संदिग्ध प्रतीत हो रही है. उनके वक्तव्यों व कार्य प्रणाली में राज्य सरकार की राजनीति झलक रही है. नगर आयुक्त को बार-बार आगाह किया कि झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 में दिए गए अधिकारों का सम्मान करें और शहर के विकास व जनहित से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य करें, ताकि आम जनता के पैसों का सदुपयोग हो. परंतु उनके माध्यम से ऐसी योजनाएं व प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व की क्षति होने की प्रबल संभावना प्रतीत हो रही है. झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत दी गई शक्तियों को दरकिनार कर वे अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी एजेंसी को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.
मेयर ने कुछ बिन्दुओं पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए बताया कि 25मार्च को निगम परिषद की बैठक आहूत की गयी, जबकि 23 मार्च को उनके पास निगम परिषद की बैठक से संबंधित एजेंडों की फाइल भेजी गई थी. उस कार्यवृत्त संख्या-03, 04, 05, 06 व 08 को परिषद की बैठक में उपस्थापित करने पर रोक लगाते हुए, नगर आयुक्त को यह निर्देश दिया गया था कि संबंधित एजेंडों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि यह स्पष्ट हो कि किस आधार पर संबंधित प्रस्तावों को तैयार किया गया है. ताकि प्रस्ताव पर अप्रैल माह में होने वाले परिषद् बैठक में लाने के लिए अनुमति दिया जा सके. लेकिन आदेश के बाद भी नगर आयुक्त ने संबंधित योजनाओं व प्रस्तावों से संबंधित विस्तृत जानकारी नहीं दी.
आशा लकड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस प्रकार से उक्त सभी एजेंडों का प्रस्ताव तैयार किया गया है, उससे यह स्पष्ट है कि नगर आयुक्त, झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 का उल्लंघन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिन पांच एजेंडों को निगम परिषद की बैठक में उपस्थापित करने पर रोक लगाई गई थी, उसे नगर आयुक्त ने जबरन परिषद की बैठक में उपस्थापित किया और येन-केन प्रकारेण पारित कराने का दबाव बनाया. उन्होंने कहा कि यदि नगर आयुक्त मेयर के निर्देशों का पालन करते तो निगम परिषद की बैठक शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न होती. परंतु नगर आयुक्त ने मेयर के निर्देशों का उल्लंघन कर अपनी मनमानी की. जिन एजेंडों पर रोक लगाई गई थी, उन्हें निगम परिषद की बैठक में उपस्थापित कर उन्होंने परिषद् के सदस्यों के माध्यम से हंगामा कराया.
आशा लकड़ा ने कहा कि यदि नगर आयुक्त को राजनीति ही करनी है तो वह उन्हें राजनीतिक मंच पर आमंत्रित करती है. नगर आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता व महाधिवक्ता रहे हुए अधिवक्ता से प्राप्त मंतव्य भी उपलब्ध कराया, फिर भी वे तर्क-वितर्क कर स्वयं को कानूनी विशेषज्ञ मान रहे है.

