रांचीः आस्था का महापर्व र चैती छठ 16 अप्रैल से आरंभ होकर 19 अप्रैल तक चलेगा. यह पर्व चार दिन तक चलने वाला चैती छठ शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरुआत हो रही है. लोक आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है. यह पर्व चैत्र माह में और कार्तिक माह में मनाया जाता है. इसमें उगते व डूबते सूर्य की पूजा की जाती है. छठ का व्रत काफी कठिन व नियम के साथ किया जाता है. इस पर्व में सूर्य भगवान की विशेष उपासना की जाती है. खड़ेश्वरी मंदिर के पूजारी राकेश पांडेय के आनुसार चैत्री छठ श्रद्धा भक्ति के साथ करना अत्यंत लाभकारी है. इस पर्व में मुख्यतः सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे ज्यादा महत्व माना गया है. 16 अप्रैल को नहाय- खाय किया जाएगा. नहाय खाय के दिन पूरे घर की साफ- सफाई की जाती है और स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है. इस दिन चने की सब्जी, चावल, साग, कद्दू खाया जाता है. अगले दिन खरना से व्रत की शुरुआत होती है. लोहंडा व खरना छठ पूजा का दूसरा दिन 17 अप्रैल शनिवार को खरना किया जाएगा. इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को आम की लकड़ी जलाकर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाती हैं और फिर सूर्य देव की पूजा करने के बाद यह प्रसाद ग्रहण किया जाता है. इसके बाद व्रत का पारणा छठ के समापन के बाद ही किया जाता है. 18 अप्रैल रविवार को छठ पूजा का मुख्य दिन और चैत्री छठ के तीसरा दिन शाम के समय महिलाएं नदी या तालाब में खड़ी होकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं. 19 अप्रैल सोमवार को इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब के पानी में उतरकर सूर्यदेव से प्रार्थना करती हैं. इसके बाद उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा का समापन कर व्रत का पारणा किया जाता है.

