सुरूर रज़ा,
रांची: यूं तो आज का दौर आधुनिकीकरण का है, फिर भी रांची से महज 25 किलोमीटर दूर एक गांव तुरुप है जहां आज के दौर में भी ग्रामीण अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नाव से सफर करते है.

ग्रामीणों न बताया कि जिस रास्ते को दो घंटों में सड़क के रास्ते तय किया जाता है. वहीं नाव के द्वारा महज 10 मिनट लगते है, सदियों से ग्रामीण इसी नाव के रास्ते आज तक यूंही सफर कर रहे है.

न सिर्फ लोग बल्कि लोगों के साथ-साथ साइकिल, मोटरसाइकिल और अन्य जरूरत के सामान भी नाव के द्वारा ही एक ओर से दूसरी ओर ग्रामीण लेकर जाते हैं.


