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झारखंड में फाइनेंशियल क्राइसिस! हर माह वेतन में 400 करोड़ खर्च, चल रही है श्वेत पत्र जारी करने की तैयारी

by bnnbharat.com
January 14, 2020
in समाचार
झारखंड में फाइनेंशियल क्राइसिस! हर माह वेतन में 400 करोड़ खर्च, चल रही है श्वेत पत्र जारी करने की तैयारी

झारखंड में फाइनेंशियल क्राइसिस! हर माह वेतन में 400 करोड़ खर्च, चल रही है श्वेत पत्र जारी करने की तैयारी

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खास बातें:-

  • खंगाला जा रहा सभी विभागों के खर्च का स्टेटस, खजाने में लगभग 2500 करोड़ रुपए

  • विकास योजनाओं के लिए रघुवर सरकार ने पांच साल में लिए 47640.14 करोड़ कर्ज

  • ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं की देनदारी की रफ्तार भी धीमी, इंफ्रास्ट्रक्चर का काम कर रही कंपनियों में भी वित्तीय संकट

  • एजी से खर्च की गई राशि का मिलान भी नहीं, अफसरों का रहा उदासीन रवैया

रांचीः झारखंड फाइनेंशियल क्राइसिस से गुजर रहा है. वजह यह है कि खाजने में राशि की कमी हो गई है. अचानक राशि की निकासी के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है. फिलहाल सभी विभागों द्वारा खर्च किए गए स्टेटस को खंगाला जा रहा है. जल्द ही हेमंत सरकार श्वेत पत्र जारी करेगी. फिलहाल सरकारी कर्मचारियों के वेतन मद में लगभग हर महीने 400 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाता है.

जानकारी के अनुसार, फिलहाल खजाने में लगभग 2500 करोड़ रुपए हैं. वित्त विभाग के अनुसार राशि खजाने में आती-जाती रहती है, लेकिन अब तक की स्थिति यह है कि कोई भी बड़े प्रोजेक्ट के लिये राशि उपलब्ध नहीं है. ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं का भी भुगतान नहीं हुआ है.

राशि का मिलान नहीं होना भी बनी वजह

एजी ने कई बार सरकार से राशि के मिलान का आग्रह भी किया. लेकिन अफसरों के उदासीन रवैये के कारण अब तक राशि का मिलान नहीं हो पाया है. दूसरी तरफ राजस्व वसूली भी कम हो रही है. एसी-डीसी बिल की बाध्यता खत्म होने के कारण भी वित्तीय संकट गहरा रहा है. अब अफसर उपयोगिता प्रमाण पत्र में सिर्फ लिखकर दे देते हैं कि पैसा का उपयोग हो गया है. लेकिन इसका कोई सत्यापन नहीं हो पा रहा है.

हेमंत सरकार के लिए होगी चुनौती

हेमंत सरकार के लिए फाइनेंशियल क्राइसिस से निकलना चुनौती होगी. पूर्व की रघुवर सरकार ने पिछले पांच साल में विकास योजनाओं एवं अन्य मदों के लिए 47640.14 करोड़ कर्ज भी लिया है. अब तक झारखंड में कुल कर्ज 85234 करोड़ रुपए का हो गया है. नई सरकार के लिए कर्ज चुकता करना एक बड़ी चुनौती भी होगी.

बताते चलें कि पिछले 14 साल (राज्य गठन से लेकर 2014 तक) में विभिन्न सरकारों द्वारा कुल 37593.36 करोड़ ही कर्ज लिये गये थे.

ऐसा है कर्ज चुकाने का अंकगणित

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य से सिर्फ 19250 करोड़ ही टैक्स मिलेगा. इसके अलावा केंद्र से अनुदान के रूप में 13850 रुपये ही मिलेंगे. इन दोनों को जोड़ दिया जाये तो कुल राशि होती है 33100 करोड़. फिर भी 52134 करोड़ का कर्ज रह ही जायेगा.

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, गैर कर सहित अन्य स्त्रोतों से 69130 करोड़ मिलने का अनुमान लगाया है. अगर इसे भी मान लिया जाये, तो भी 16104 करोड़ का कर्ज रह ही जायेगा. राज्य कर में भी 945.81 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. वित्तीय वर्ष 2014-15 में राज्य कर से 10349.81 करोड़ रुपये मिले थे.

घाटे में चल रही हैं काम करने वाली कंपनियां

राज्य में आधारभूत संरचनाओं का निर्माण करने वाली कंपनियां घाटे में चल रही हैं. जेआईआईसीएल, झारखंड मूरी रोड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड, जेआरपीआइएल और जेएआरडीसीएल घाटे में चल रही हैं.

कंपनी के ऑडिट वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी की देनदारियां 2013-14 से बढ़ गयी हैं. 2013-14 में जहां कंपनी की देनदारी 18,145 करोड़ थी, वहीं 2017-18 में बढ़कर 32,811 करोड़ पर पहुंच गयी है. पिछले पांच वर्षों में कंपनी का नेटवर्थ भी 5504 करोड़ से घटकर 4361 करोड़ पहुंच गया है.

डीपीआर का खेल और प्रोजेक्ट कॉस्ट का बढ़ा भी बना वजह

पिछली सरकार ने कई नये प्रोजेक्ट भी लिए हैं. इसका असर खजाने पर भी पड़ा. कई प्रोजेक्ट्स में जोड़-तोड़ और फिर से निर्माण के कारण प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ गया. रांची में पहले चरण में सीवरेज-ड्रेनेज के लिए 360 करोड़ का कार्यादेश कानपुर की कंपनी ज्योति बिल्डटेक को मिला था.

कंपनी को 54 करोड़ रुपये की अग्रिम और चार करोड़ का बिल भुगतान भी किया गया. 18 महीने के अंदर न तो प्रोजेक्ट पूरा हुआ और ना ही काम आगे बढ़ा. फिर कंपनी ने कहा कि प्रोजेक्ट कॉस्ट 8 फीसदी और बढ़ाया जाये साथ ही मियाद भी बढ़ाई जाये. इसी तरह एक दर्जन से भी अधिक प्रोजेक्ट्स का कॉस्ट बढ़ गया है. इसकी तरह बिरसा स्मृति पार्क, टाइम स्कॉवयर के डिजाइन भी फिर से बदले गये.

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