रांची: आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला ने कहा है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय चालू बैठक मेंइस बार क्रेडिट ग्रोथ पर फोकस होगा और लीक से हटकर कई फैसले लिये जा सकते है.
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय चालू बैठक में रेपो रेट को किसी तरह घटाने या यथास्थिति बनाये रखने पर फैसला लेने को लेकर इस बार बड़ी ही ऊहापोह की स्थिति है.
छह अगस्त को बैठक में लिये गये फैसले पॉलिसी स्टेटमेंट के जरिये सार्वजनिक किये जाएंगे. उन्होंने कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति के तय किये गये न्यूनतम अधिकतम सीमा के आधार पर रेपो रेट को घटाता है या बढ़़ाता है.
ब्याज दरों को कम करने से इकॉनमी को गति मिलती है और मुद्रास्फीति के बढ़ने की आशंका बनती है. इसके विपरीत ब्याजदरों में वृद्धि मुद्रास्फीति पर लगाम लगाती है.
मालूम हो कि जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित जिसे खुदरा महंगाई से जाना जाता है, वह 6.09प्रतिशत रही है, जो स्वीकार्य अधिकतम सीमा 6 प्रतिशत से ऊपर है, यही वह नंबर है, जो एमपीसी मौद्रिक पॉलिसी कमेटी के सामने दुविधा उत्पन्न कर रही है और रेपो रेट में आगे कटौती करने से रोक भी रही है.
फरवरी से अब तक आरबीआई ने 1.15प्रतिशत की कटौती की है और बैंकों ने भी 72 से 82 आधार अंकों की कटौती करके ग्राहकों को इसका फायदा दिया है, परंतु इतनी कटौतियों के बावजूद न तो क्रेडिट ग्रोथ में अपेक्षित वृद्धि हुई और न ही जीडीपी के वृद्धि दर के अनुमानों में.
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि गवर्नर शक्तिदास की अगुवाई में एमपीसी का नजरिया विकास दर के समर्थन का रहा है. खुदरा महंगाई न बढ़े और विकास की गति भी जारी रहे, इसके लिए आरबीआई इस बार की बैठक में रेपो रेट न घटाकर रिवर्स रेपो रेट में कटौती कर सकती है,क्योंकि बैंक अपने सरप्लस पूंजी को रिवर्स रेपो के जरिये आरबीआई में लगभग 6लाख करोड़ रुपये जमा करके ब्याज कमाना ज्यादा सेफ समझते है, बजाय ग्राहकों को उधार देने के.बैंकों की इसी प्रवृति पर लगाम लगाने के लिए आरबीआई रिवर्स रेपो रेट 3.35 प्रतिशत है,उसमें कुछ और कटौती करने का निर्णय ले. जहां तक दृष्टिकोण का सवाल है, वह समंजनशील ही बने रहने की संभावना है.

