रांची: झारखंड हाईकोर्ट चारा घोटाले से जुड़े मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर 16 अप्रैल को सुनवाई करेगी. लालू की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल अदालत में उनकी जमानत अर्जी पर दलीलें पेश करेंगे. जबकि लालू की जमानत के विरोध में केंद्रीय जांच एजेंसी, सीबीआइ पुरजोर तरीके से कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी. यह मामला उच्च न्यायालय में जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है.
बता दें कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिनों का समय दिया था. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए लालू की नयी जमानत याचिका पर शुक्रवार को बहस की थी. साथ ही उन्होंने कहा था कि सीबीआई राजनीतिक कारणों से लालू को जेल में रखना चाहती है और इसीलिए वह वह मामले को जानबूझकर लटका रही है.
वहीं लालू परिवार को अबकी बार राजद अध्यक्ष को जमानत मिलने की पूरी उम्मीद में भगवान और अल्लाह की भक्ति में जुटा है. लालू के छोटे बेटे और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बीते दिन बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में भगवान भोलेनाथ का दर्शन-पूजन कर पिता की रिहाई की कामना की. तेजस्वी ने कामाख्या मंदिर में भी पिता की सलामती के लिए पूजा-पाठ किया.
लालू की बेटी रोहिणी ने इससे पहले रमजान के मुबारक मौके पर अपने पिता लालू प्रसाद यादव की अच्छी सेहत और जेल से रिहाई के लिए रोजा रखने की घोषणा की थी. रोहिणी ने ट्विटर पर अपने संदेश में लिखा था कि रमजान का पाक महीना शुरू हो रहा है, इस साल हमने भी फैसला किया है कि पूरे महीने अपने पापा के सेहतयाबी और सलामती के लिए रोजा रखूंगी. पापा की हालत में सुधार हो और जल्दी न्याय मिल सके, इसकी भी दुआ करुंगी.
इधर, चारा घोटाले के दुमका कोषागार मामले में झारखंड हाई कोर्ट से एक बार जमानत याचिका खारिज होने के बाद लालू प्रसाद यादव की ओर से फिर से सजा की आधी अवधि काट लेने के तर्क के साथ कोर्ट से बेल की मांग की गई है. जबकि सीबीआइ की ओर से दाखिल किए गए जवाब में एजेंसी की ओर से लालू यादव की जमानत याचिका के औचित्य पर सवाल उठाया गया है. सीबीआइ ने साफ कहा है कि दुमका मामले में लालू को सात-सात साल की दो सजाएं अलग-अलग धाराओं में दी गई है.
ऐसे में लालू प्रसाद को दुमका मामले में कुल 14 साल जेल की सजा काटनी है. सीबीआइ की विशेष अदालत ने अपने सजा आदेश में स्पष्ट कहा है कि दोनों सजाएं एक के बाद एक चलेंगी. इस लिहाज से लालू की आधी सजा की अवधि सात साल की होती है. जिसे पूरा होने में अभी 3 साल से अधिक का वक्त है. लालू को इन हालात में जमानत कैसे दी जा सकती है. लालू के वकील कपिल सिब्बल ने सीबीआइ पर लालू को जेल से नहीं निकलने देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश लाने की आशंका जाहिर की है.
बहरहाल, लालू की सजा अवधि सात साल मानकर उनकी जमानत पर सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट से लालू को राहत की पूरी उम्मीद है. अब शुक्रवार को सीबीआइ लालू की जमानत के विरोध में अपने तर्क के साथ क्या नया दांव आजमाती है, यह देखने वाली बात होगी. लालू की जमानत और उनके जेल से छूटने पर लालू समर्थकों और राजद के नेता-कार्यकर्ता की नजरें टिकी हैं. शुक्रवार को राजद, लालू और लालू परिवार के लिए अहम दिन होगा.

