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पठन-पाठन शुरू करने के मसले पर अभिभावकों के सुझाव पर अमल हो: आलोक दूबे

by bnnbharat.com
September 2, 2020
in समाचार
स्पीकर पर दबाव बनाना संसदीय परंपरा के खिलाफ: आलोक दूबे
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रांची: पासवा के झारखंड राज्य इकाई के अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा है कि कोरोना संक्रमण की मौजूदा परिस्थितियों के बीच स्कूलों में पठन-पाठन शुरू करने के मसले को लेकर अभिभावकों के सुझाव पर अमल किया जाना चाहिए. पासवा ने राज्य सरकार द्वारा अभिभावकों से स्कूल खोलने को लेकर पचास प्रतिशत सिलेबस कम करने के सुझाव का स्वागत किया है.

आलोक कुमार दूबे ने बताया कि अधिकांश अभिभावकों का यह मत है कि मौजूदा सिलेबस को 50 प्रतिशत कम किया जाए, अभिभावकों का यह भी कहना है कि सिलेबस में टॉपिक हटाने की जगह पूरे चैप्टर को ही हटा दिया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 21 सितंबर से गाइडलाइन के तहत बड़े बच्चों के लिए स्कूल-कॉलेज खोलने की बात की है.  फ्रांस-इंग्लैंड समेत कई देशों में भी 1 सितंबर से स्कूल खोलने की अनुमति दी गयी है.

पासवा के अध्यक्ष ने कहा कि एसोशिएशन की ओर से शैक्षणिक कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिला स्तरीय कमेटी भी गठित की जाएगी एवं लगातार मुआयना कर पठन-पाठन शुरू होने पर गाइडलाइन के अनुपालन पर नजर रख सकेगी. अब अभिभावकों को भी अपने बच्चों के पठन-पाठन को लेकर चिंता सताने लगी है, इसलिए तमाम एहतियात और सतर्कता बरतते हुए बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए.

हालांकि स्कूल खोलने को लेकर अंतिम फैसला राज्य सरकार को ही करना है. पासवा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पठन पाठन छोड़कर दुनिया में सभी काम हो रहे हैं, बड़े बच्चों खासकर 9,10,11,12 की कक्षाऐं प्रारंभ की जा सकती हैं, क्योंकि कई अभिभावकों ने एक दिन गैप करके एवं सरकारी कार्यालयों की तरह 40 प्रतिशत उपस्थिति के मद्देनजर स्कूल खोलने पर सहमति जताई है.

आलोक दूबे ने कहा जिस प्रकार बच्चों एवं अभिभावकों के न चाहते हुए भी जेइई एवं नीट की परीक्षा केन्द्र सरकार ने लेने का काम किया है उसी प्रकार 10 एवं 12 के बच्चों को भी समय पर और पूरे सिलेबस के साथ परीक्षाऐं लेने के लिए मजबूर करे इससे इंकार नहीं किया जा सकता है. इसलिए राज्य सरकार एवं अभिभावकों को हर पहलू पर विचार करना चाहिए.

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