नई दिल्ली: डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी में अब तक भारतीय पूंजी बाजार में शुद्ध रूप से 5,177 करोड़ रुपये का निवेश किया है. यह लगातार छठी बार है जब विदेशी निवेशकों ने खरीदारी का सिलसिला जारी रखा है.
आंकड़ों के अनुसार, तीन फरवरी से सात फरवरी के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने ऋणपत्रों में 6,350 करोड़ रुपये लगाए है.
वहीं इस दौरान शेयरों से उन्होंने 1,172.56 करोड़ रुपये की निकासी की. इस तरह आलोच्य अवधि के दौरान वे 5,177.44 करोड़ रुपये के शुद्ध निवेशक रहे.
इस संदर्भ में मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के वरिष्ठ विश्लेषण प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने और रुख को उदार बनाए रखने के कारण विदेशी निवेशकों ने निवेश किया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चीन में कोरोना वायरस के फैले संक्रमण का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. इसलिए एफपीआई भारत जैसे उभरते बाजारों में पैसा लगाने में सतर्कता बरत रहे हैं.
वहीं बजाज कैपिटल के शोध एवं सलाहकार प्रमुख आलोक अग्रवाल ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2020 में विदेशी निवेश आकर्षित करने को लेकर कई उपाय किए गए हैं, जिसकी वजह से आने वाले समय में भी भारत में एफपीआई का आकर्षण बना रह सकता है.
साल 2019 में एफपीआई ने घरेलू बाजारों (शेयर और ऋण दोनों) में शुद्ध रूप से 73,276.63 करोड़ रुपये डाले थे. बता दें कि जनवरी, जुलाई और अगस्त को छोड़कर एफपीआई साल 2019 के शेष महीनों में शुद्ध लिवाल रहे हैं.
बता दें कि जब एक अंतरराष्ट्रीय निवेशक, किसी अन्य देश के उद्यम की निष्क्रिय होल्डिंग में निवेश करता है, यानी वित्तीय परिसंपत्ति में निवेश करता है, तो इसे एफपीआई के रूप में जाना जाता है.

