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“लाॅकडाउन में भूल जाओ”
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भूल जाओ शादी व्याव
भूल जाओ बरातें,
भूल जाओ लाइट टेंट
भूल जाओ कनातें।
भूल जाओ पंगतें
भूल जाओ संगतें,
भूल जाओ बफे मफे
भूल जाओ सब लतें।
भूल जाओ फूफा को
भूल जाओ जीजा को,
भूल जाओ चाटमाट
भूल जाओ पीजा को।
भूलो बाजार को
भूलो व्यापार को,
भूल जाओ साइकिल
भूल जाओ कार को।
भूल जाओ झूमना
भूल जाओ घूमना,
भूल जाओ बार बार
धरती को चूमना।
भूल जाओ मौसी को
भूल जाओ मौसा को,
भूल जाओ पानी पुरी
भूल जाओ समौसा को।
भूल जाओ कलकत्ता
भूल जाओ बैंगलोर,
भूल जाओ मुंबई को
भूल जाओ इंदौर।
भूल जाओ ट्रेन को
भूल जाओ प्लैन को,
भूल जाओ भीड़भाड़
भूल जाओ चेन को।
भूल जाओ मेला को
भूल जाओ रेला को,
भूल जाओ इनकम को
भूल जाओ धेला को।
याद रखो दुनियां में
एक ही बस रोना है,
वायरस इक आया है
नालायक कोरोना है।
बार बार हाथ धोना
दूरी भी रखना है,
काढ़े को पीना है
न केवल चखना है।
घर में ही रहना है
घर में खाना है,
बिना किसी मतलब के
बाहर नहीं जाना है।
दूरी भी रखेंगे हम
मास्क भी लगायेंगे,
जीतेंगे हम ही कल
कोरोना को हरायेंगे।

सतीश श्रीवास्तव
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