रांची : भारत सरकार के पूर्व मुख्य निशक्तता आयुक्त प्रसन्न कुमार पिंचा का आकस्मिक निधन रविवार की सुबह दिल्ली में हो गया. भारत में दिव्यांगता अधिकार कार्यकर्ता, दिव्यांगता विशेषज्ञ , एक वकील व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में स्पेशल रिपोर्टयर दिव्यांगता के पद पर कार्यरत थे. सन 2011 से 2014 तक वह मुख्य निशक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत थे, इस दौरान उन्होंने दिव्यांग जनों के लिए बनाए गए कानूनों को पूरे देश में अनुपालन के लिए अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किए और दिव्यांग जनों के पक्ष में शिकायतों पर उचित निर्णय भी दिए. वह बचपन से ही दृष्टिबाधित थे और उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत असम के एक दृष्टिबाधित स्कूल में प्राचार्य के पद से शुरू की. बाद में वह असम सरकार में सोशल वेलफेयर विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्य किया. इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्था एक्शन एड में नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र के वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर भी कार्य किया. इस दौरान उन्होंने झारखंड के कई जिलों का भी भ्रमण किया.
दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता अरुण और अजीत बताते हैं कि उनकी सोच में एक समग्रता थी, पारदर्शिता थी, निष्पक्षता थी. वे संपूर्ण समुदाय हित में कैसे कार्य किया जाए. इस सोच के साथ चलते थे और ऐसे फैसले लेते थे जो पूरे भारत के दिव्यांग जनों के दूरगामी हित में हो. आयुक्त रहते हुए अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्होंने यह साबित किया कि पद महत्वपूर्ण नहीं होता, समुदाय महत्वपूर्ण होता है.
युवा दिव्यांग जनों के साथ उनका बहुत अच्छा लगाव था. वे चाहते थे कि पूरे भारतवर्ष में दिव्यांग जनों के अधिकारों के लिए जितना अधिक युवा वर्ग सामने आएगा, उतना ही सशक्तिकरण दिव्यांग जनों का होगा. कानूनों और नियमों के बनने से सशक्तिकरण धरातल पर नहीं उतरता है. देश के हर जिले हर शहर और हर राज्य में दिव्यांग जनों के हित में कार्य करने वाले सच्चे निष्पक्ष नेतृत्व की जरूरत होती है, ऐसा उनका मानना था.
दृष्टिबाधित जनों के लिए कार्य करने वाली संस्था लक्ष्य फ़ॉर डिफरेंटली एबल की ओर से अरुण कुमार सिंह व दिव्यांग अधिकार मंच की ओर से अजीत कुमार एवं झारखंड के सभी दिव्यांग व दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोग व विबिन्न संगठनों ने उनकी दिवंगत आत्मा को भावपूर्ण श्रद्धाजंलि दी. मौके पर राहुल मेहता, मंतोष कुमार, अतुल सहाय, मिथिलेश कुमार एवं अन्य लोगों ने भी उन्हें भावपूर्ण श्रधांजलि दी और झारखंड के सभी दिव्यांग जन की तरफ से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. दिव्यांग जनों व दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी संगठनों से अनुरोध करते हैं कि उनके विचारधारा को मानते हुए अगर हम आगे बढ़े तभी समस्त दिव्यांग समाज का सशक्तिकरण हो सकता है और इससे बड़ी श्रद्धांजलि उनके लिए कुछ भी नहीं होगा.

