रांची:- झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन आज अल्पसूचित प्रश्न के दौरान विधायक बंधु तिर्की ने राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी सुनील वर्णवाल की पत्नी ऋचा संचिता को विभिन्न बोर्ड , निगम और प्राधिकार में अधिवक्ता बनाये जाने का मामला उठा.
संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने बताया कि रिटायर आईएएस अशोक कुमार सिंह 33 में से 16 विभाग में अधिवक्ता के रूप में सेवा ली जा रही है, जबकि ऋचा संचिता से दो विभागों में सेवा ली जा रही है. उन्होंने सरकार इस मामले में जांच कराएगी और समीक्षा के बाद निर्णय लेगी.
विधायक बंधु तिर्की ने बताया कि बोर्ड-निगम और अन्य प्राधिकार में सेवा लेने के लिए अधिवक्ता के पास सात साल का अनुभव रहना जरूरी है, लेकिन इनके पास उसका अभाव है. इसलिए इन्हें हटाया जाना चाहिए,क्योंकि इन्हें रखने के कारण अन्य मेधावी वकीलों का हक मारा जा रहा है.
विधि विभाग की ओर से लिखित जवाब में बताया गया है कि अशोक कुमार सिंह से झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिड, मंत्रिमंडल विभाग विभाग, ग्रामीण विकास के जेएसआरआरडीए, कृषि विपणन पर्षद, टीवीएनएल, जियाडा, रिनपास में अधिवक्ता के रूप में सेवाएं ली जा रही है. विभाग की ओर से यह भी जानकारी दी गयी है कि द झारखंड लॉ ऑफिसर रूल्स 2016 की कंडिका 4, 5 एवं 6 के अनुसार राज्य सरकार द्वारा संबंधित वादों में उच्च न्यायालय और व्यवहार न्यायालय के पक्ष में रखे जाने के लिए या तो राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय रांची या सर्वाच्च न्यायालय नई दिल्ली में नियुक्त विधि पदाधिकारियों की सेवा लेने के लिए स्वतंत्र रूप से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए विद्वान महाधिवक्ता एवं विधि विभाग के प्रधान सचिव से परामर्श से स्वतंत्र अधिवक्ता रखे जाने का प्रावधान है. उच्च न्यायालय में पैरवी करने के लिए गठित अधिवक्ताओं के पैनल में जयंत फ्रैकलिंन टोप्पो और लक्ष्मी मुर्मू स्थायी सलाहकार के रूप में नियुक्त है.
