खास बातें:-
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ट्वीट कर कहा, पूर्व महाधिवक्ता विधानसभा चुनाव में मेरे विरूद्ध प्रचार किया
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पूर्व सीएम आवास और सुविधाएं नहीं दें
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पूर्व महाधिवक्ता ने पद की गरीमा को किया कलंकित
रांचीः पूर्व मंत्री सह निर्दलीय विधायक सरयू राय ने एक बार फिर से पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार और पूर्व सीएम रघुवर दास पर निशाना साधा है.
ट्वीट कर कहा है कि झारखंड को नये महाधिवक्ता मिल गये. आशा है आप पद की गरिमा पुन: बहाल करेंगे जिसे पूर्व महाधिवक्ता ने कलंकित किया है. पूर्व महाधिवक्ता गत विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर आये. मेरे विरूद्ध प्रचार किया. मुझे हराने के लिये नालंदा होटल में स्वजातीय मीटिंग की. फिर द्वीट कर कहा कि पूर्व महाधिवक्ता 2016 में अतिरिक्त महाधिवक्ता थे. अतिरिक्त मुख्य सचिव, खान विभाग ने इनके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिये लिखा.
उन्होंने कहा कि खान विभाग से बात किये बिना इन्होंने हाईकोर्ट में बहस कर दिया. विभाग हार गया. कार्रवाई की जाय. मुख्यमंत्री ने कारवाई नहीं की.. महाधिवक्ता ने 2018 में हाईकोर्ट में कहा कि खान विभाग लौह अयस्क लीजधारी से फाईन की करोड़ों की राशि का भुगतान 20 किश्तों में लेने पर सहमत है. विभाग ने कहा सहमति दी ही नहीं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश एकमुश्त फाइन लेने का है. फिर इसका लीज रद्द हुआ..
जमशेदपुर के भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले की 5 एकड़ की जमीन के मामले में महाधिवक्ता ने राजस्व विभाग को बताया कि स्थागनादेश के बाद सरकार विधिसम्मत कार्रवाई कर सकती है.. महाधिवक्ता ने एक दिन सरकार को लिखा कि भाजपा नेता काले की 5 एकड़ जमीन पर स्थागनादेश के बावजूद कार्रवाई करने का हाईकोर्ट ने मौखिक आदेश दिया है.
इसपर सरकार ने जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी. तथ्य बताने पर कोर्ट ने फटकारा, तब ये पलटे, शपथ देकर पहले की चिट्ठी वापस ली.
मेरे खिलाफ निंदा का प्रस्ताव पास करा दिया
सरयू राय ने कहा कि मैने महाधिवक्ता के प्रोफेशनल मिसकंडक्ट का मामला उठाया तो इन्होंने पदेन अध्यक्ष के नाते राज्य बार काउंसिल से मेरे विरूद्ध निन्दा का प्रस्ताव पास करा दिया. मेरी नोटिस पर लिखित आश्वासन के बावजूद काउंसिल ने प्रस्ताव वापस नहीं लिया है.
सीएम हेमंत सोरेन इस पर कार्रवाई करें, नहीं तो मैं करूंगा. ऐसा झारखंड में ही संभव है कि जिस महाधिवक्ता की नियुक्ति कैबिनेट करती है वह उसी कैबिनेट के सदस्य के विरूद्ध अपनी अध्यक्षतावाली बार काउंसिल से निन्दा प्रस्ताव पास कराता है. इसपर कार्रवाई तो दूर मुख्यमंत्री स्पष्टीकरण तक नहीं पूछते, मंत्रीगण मौन रहते हैं. पर जनता समय से न्याय कर देती है.
पूर्व सीएम के आवास का मामला भी
सरयू राय ने ट्वीट कर कहा है कि याचिका 657/2004 में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास एवं अन्य सुविधायें सरकार नहीं दे. तत्कालीन सरकार ने जनहित याचिका 4509/2016 में 7.9.2018 को हाईकोर्ट को जवाब दिया है कि यह निर्णय झारखंड में लागू है. सीएम हेमंत सोरेन इस पर ध्यान दें और ध्यान दिलाएं.

