रांची:- लोक आस्था का महापर्व नहाय-खाय के साथ कल से शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही व्रतियों का नियम-निष्ठा आरंभ हो जाएगा. आचार-व्यवहार से लेकर रहन सहन तक अगले चार दिनों तक सात्विक रहेगा. गुरुवार 19 नवंबर की संध्या में खरना अनुष्ठान के साथ ही व्रतियों का निर्जला उपवास आरंभ हो जाएगा. जबकि, शुक्रवार 20 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. और शनिवार 21 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिनी महापर्व छठ संपन्न हो जाएगा. छठ को महाभारत पर्व भी कहा जाता है. मान्यता है कि महाभारत काल से ही छठ व्रत की परंपरा रही है. कुंति-सूर्य पुत्र कर्ण प्रतिदिन घंटों कमर तक जल में खड़ा होकर सूर्यदेव की आराधना करते थे और अर्घ्य देते थे. दूसरी ओर, यह भी कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडव और द्रौपदी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि को सूर्य भगवान का विशेष पूजन व अर्घ्य देते थे. पुत्रों की कामना से द्रौपदी निर्जला उपवास रखकर सूर्य देव की पूजा करती थीं. श्रद्धालु सूर्योपासना की तैयारी में जुट गए हैं. घरों में प्रसाद के लिए गेहूं, चावल आदि इकट्ठा किए जा रहे हैं. शहर के विभिन्न चौक चौराहों पर छठ पूजन के सामग्री मिल रहे है.

