दीपक,
रांची: राजधानी रांची के सीवरेज-ड्रेनेज का काम कर रही कानपुर की कंपनी ज्योति बिल्डटेक को हटाने की सिफारिश चार वर्ष पहले ही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट (पीएमसी) मैनहर्ट सिंगापुर ने की थी. पीएमसी ने कहा था कि समझौते के विपरीत ज्योति बिल्डटेक को काम शुरू करने के लिए अधिक अग्रिम (एडवांस) का भुगतान कर दिया गया. काम की प्रगति को देखते हुए ज्योति बिल्डटेक को 5-5-5 प्रतिशत के आधार पर अग्रिम राशि का भुगतान करना था पर नगर निगम के अधिकारी और नगर विकास विभाग की तरफ से अग्रिम की राशि 10 फीसदी कर दी गयी. 14 अक्तूबर 2015 में सिवरेज ड्रेनेज के पहले चरण की शुरुआत रांची में की गयी थी.
नगर निगम प्रशासन की तरफ से काम की धीमी प्रगति को देखते हुए 16.10.2019 को ज्योति बिल्डटेक को टर्मिनेट करते हुए फिर से निविदा निकालने की बातें कही गयी हैं. सूत्रों का कहना है कि ज्योति बिल्डटेक को परियोजना के लिए 160 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है. कांट्रैक्टर कंपनी को लगातार पैसे का भुगतान नगर निगम प्रशासन और नगर विकास विभाग के अधिकारियों की अनुमति के बाद किया जाता रहा.
योजना में डेढ़ वर्ष बाद खुला एस्क्रो अकाउंट
सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना के लिए हुए समझौते के आधार पर पहले दिन से ही एस्क्रो अकाउंट खोला जाना था. इसमें ज्योति बिल्डटेक और नगर निगम को 50-50 प्रतिशत राशि डालना था, ताकि योजना का काम चल सके. जानकारी के अनुसार डेढ़ वर्ष बाद यह खाता खोला गया. पहले डेढ़ वर्ष तक परियोजना के लिए सिर्फ नगर निगम की तरफ से ही इस खाते में पैसे डाले गये. ज्योति बिल्डटेक ने कितने पैसे खाते में डाले, इसका भी कोई हिसाब-किताब नहीं है.
नगर निगम प्रशासन ने पहले के पीएमसी की जगह वैपकोस को बना दिया सलाहकार
नगर निगम प्रशासन की तरफ से पूर्व के पीएमसी मैनहर्ट सिंगापुर लिमिटेड को यह कहते हुए हटा दिया गया था कि वह बार-बार शर्तों का उल्लंघन होने और कांट्रैक्टर कंपनी को हटाने की बात करता था. पूर्व के पीएमसी ने नगर निगम प्रशासन और सरकार को 10 से अधिक बार पत्र लिख कर काम की गुणवत्ता और अन्य के बाबत ध्यान आकर्षित कराया. बाद में वैपकोस लिमिटेड को पीएमसी बना दिया गया. फिर भी काम की प्रगति काफी धीमी ही रही.

