रंजीत कुमार,
सीतामढ़ी: आजादी के बाद सोनबरसा कन्हौली के दर्जनों गांवों की तस्वीरें नही बदली, जिस तरह लोगों की जिंदगी में कोई पर्व वर्ष में एक बार आता है और व्रती सहते हैं. नियमों का पालन करते है चाहे उन्हें कितना भी कष्ट क्यों न उठाना पड़े. ठीक उसी तरह कन्हौली के भाड़सर गांव के लोगों के लिए बाढ़ भी एक वार्षिक पर्व की तरह ही है और इस पर्व को मनाने के लिए इस गांव के पीड़ित व्रती कुछ दिनों तक विस्थापित की जिंदगी भी बिताते हैं.
यह कड़वी सच्चाई है और ऐसी हालात कभी ना हो इसके लिए सरकार व प्रशासन ने कभी सुधि ली ही नही.
इसी बाढ़ ग्रस्त गांव में शनिचर पासवान व परिवार तथा फेकु राम का घर पानी में घिर चुका था, इन लोगों की स्थिति नाजुक थी. पानी में डूब सकते थे. लेकिन ग्रामीण राजू राय,संजय मंडल, रौशन मंडल, बीरेंद्र पासवान, दशरथ साह व अन्य लोगों ने ड्राम पटरी जोड़कर नाव बनाया और उन परिवार के लोगों की जान बचाने के लिए पानी में उतर पड़े, सभी को बाहर निकाल भी लिया.

