खूंटी – झारखण्ड के खूंटी और आसपास के बाजारों में इन दिनों बहुतायत में मौसमी मशरूम मिलने लगे हैं. बाजारों में सुबह से ही गांव के महिला पुरुष थैले या टोकरी में लेकर मशरूम बेचने पहुंचते हैं. मशरूम का बाजार भाव किसी भी नॉनभेज से ज्यादा होता है. प्राकृतिक रूप से जंगल और टांड़ में उगने वाले मशरूम महंगा होने के बावजूद अन्य सब्जियों की तुलना में जल्दी बिक जाता है. जिसने एक बार इसका स्वाद चखा है वो प्रत्येक वर्ष मौसमी मशरूम में इंतजार में रहता है. वैसे तो इसकी हजारों प्रजातियां हैं लेकिन खाने वाले मशरूम की प्रजातियां बहुत कम हैं .
मौसमी मशरूम जिसे बोलचाल की भाषा मे खुखड़ी भी कहते हैं. मशरूम में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनकी शरीर को बहुत आवश्यकता होती है. साथ ही ये फाइबर का भी एक अच्छा स्रोत माना जाता है है. कई बीमारियों में मशरूम का इस्तेमाल दवाई के तौर पर किया जाता है. इसमें कैलोरीज ज्यादा नहीं होतीं इसलिए हेल्थ कॉन्शस लोगों के लिए भी यह अच्छा होता है. मशरूम में कई महत्वपूर्ण खनिज और विटामिन पाए जाते हैं. इनमें विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कॉपर, आयरन पर्याप्त मात्रा में होती है. साथ ही मशरूम में कॉलाइन नाम का एक खास पोषक तत्व पाया जाता है जो मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बरकरार रखने में बेहद फायदेमंद रहता है. और खाने में इसका स्वाद भी बहुत ही लज़ीज़ होता है.
ख़ास कर खूंटी जिले के पूरे क्षेत्र में मौसमी मशरूम की बिक्री जमकर की जाती है. मशरूम के मौसम में कई सब्जी विक्रेता सिर्फ मशरूम बेचकर 20-25 हजार रुपये कमा लेते हैं. हेल्थ से लेकर इनकम तक में मशरूम का कोई जवाब नहीं।यह एक लाजवाब शब्जी और ग्रामीणों के लिए बेहतरीन आय का सोर्स भी है.

