चुनाव आयोग ने दिए संकेत, हफ्ते भर बाद कभी भी घोषणा संभव
रांची: झारखंड में विधानसभा की दो खाली सीटों दुमका और बेरमो उपचुनाव के मतदान 26 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच कराने की तैयारी की जा रही है. चुनाव आयोग ने इसके संकेत दिए हैं. इस हिसाब से हफ्ते भर बाद कभी भी उपचुनाव के तारीखों की घोषणा हो सकती है. यह घोषणा बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही होगी. दुमका सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बेरमो सीट कांग्रेस के राजेंद्र सिंह के निधन के कारण खाली हुई है.
चुनाव आयोग त्योहारों और बिहार में नई सरकार के गठन के हिसाब से कार्यक्रमों की प्रारंभिक रूप रेखा तैयार कर रहा है. इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. बिहार में वर्तमान सरकार 30 नवंबर, 2015 को बनी थी. इसलिए 29 नवंबर तक वहां हर हाल में मतगणना के बाद चुनाव परिणाम आ जाने चाहिए.
13 नवंबर को धनतेरस, 16 नवंबर को दीपावली और 21 नवंबर को छठ है. इसलिए छठ के बाद मात्र आठ दिन में 21 से 29 नवंबर के बीच मतदान और मतगणना दोनों कराना मुश्किल है. 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच नवरात्र है.
इस दौरान भी मतदान और मतगणना की प्रक्रिया से चुनाव आयोग परहेज करना चाहता है. 17 अक्टूबर से पहले मतदान कराने के लिए अब समय नहीं बचा है. क्योंकि, चुनाव घोषणा से मतदान के बीच कम से 45 दिन की अवधि होनी चाहिए. 17 सितंबर तक वैसे भी पितृपक्ष और उसके बाद मलमास है. इस कारण से चुनाव आयोग के लिए व्यवधान रहित अवधि केवल 26 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच का बच गया है.
पार्टियां रेस, दलों के दरवाजे जुट रही भीड़
दुमका और बेरमो उपचुनाव को लेकर पार्टियां रेस हो गई हैं. दोनों विधानसभा क्षेत्रों में जमीनी कवायद से लेकर पार्टियों के वार रूम में अंकगणित के अलग-अलग फ़ॉर्मूलों पर चुनौतियों की परीक्षा हो रही है. उम्मीदवारी के दावेदारों की भीड़ भी दलों के दरवाजे जुटने लगी है. भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों में तो दिल्ली दरबार तक की दौड़ चल रही है.
उपचुनाव के अहम किरदार
हेमंत सोरेन
इसलिए कि मुख्यमंत्री और प्रदेश में यूपीए का चेहरा होने के कारण सत्ता पक्ष के उम्मीदवार की जीत के लिए बेरमो में भी दारोमदार उन्हीं पर होगा. हेमंत सोरेन के इस्तीफे के कारण ही दुमका सीट खाली हुई है. इसलिए झामुमो उम्मीदवार के लिए जनसमर्थन बनाए रखने की जिम्मेवारी भी उन्हीं की है.
बाबूलाल मरांडी
इसलिए कि भाजपा विधायकदल के नेता हैं और दुमका उनका कार्यक्षेत्र रहा है. धनवार से झाविमो के टिकट पर जीते होने के कारण भाजपा विधायक दल के नेता की मान्यता पर विधानसभा में विवाद है. मरांडी के खुद भी दुमका से चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे है.
रघुवर दास
इसलिए कि पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता हैं. संताल से झामुमो के जनाधार तोड़ने में खास रुचि दिखाते हैं. बेरमो से विधानसभा उम्मीदवार बनने की संभावना जताई जा रही है.
लोईस मरांडी
इसलिए कि रघुवर सरकार में मंत्री रही और 2014 में दुमका से हेमंत सोरेन को हराकर जीती. भाजपा इस बार भी लोईस मरांडी पर दांव खेल सकती है.
अनूप-कुमार गौरव
इसलिए कि इनके पिता राजेंद्र सिंह के निधन से ही बेरमो सीट खाली हुई है. दोनों भाई कांग्रेस में सक्रिय हैं. बेरमो से टिकट पाने के लिए एक-दूसरे को पछाड़ने में लगे हैं. बाकी दलों की भी इनके रुख पर नजर है.
योगेश्वर महतो बाटुल
इसलिए कि 2014 में बेरमो से राजेंद्र सिंह को हराकर भाजपा के टिकट पर जीते. इस बार भी दावेदार हैं. चुनावी समीकरणों की चर्चा में भाजपा के अंदरखाने इनकी भी स्थिति भी मजबूत है.

