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गांधी जी की काया नहीं है, उनके विचार अभी भी अमर हैं: रामेश्वर उरांव

by bnnbharat.com
January 30, 2020
in Uncategorized
गांधी जी की काया नहीं है, उनके विचार अभी भी अमर हैं: रामेश्वर उरांव

गांधी जी की काया नहीं है, उनके विचार अभी भी अमर हैं: रामेश्वर उरांव

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रांची: प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का शहादत दिवस राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में स्थानीय बापू वाटिका मोरहाबादी में मनाया गया. इस अवसर पर प्रार्थना सभा एवं महात्मा गांधी के विचारों पर संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया. सर्वप्रथम पूर्वाह्न 11:30 बजे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ. रामेश्वर उरांव के नेतृत्व में राष्ट्रपिता को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया. तत्पश्चात गांधी के आदर्शो एवं सद्भावना को लेकर एकता सम्मेलन एवं विचार-गोष्ठी आयोजित की गई. इस अवसर पर मुख्य रूप झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सह मंत्री झारखंड सरकार डाॅ. रामेश्वर उरांव, मंत्री बन्ना गुप्ता, मंत्री बादल पत्रलेख, मुख्य वक्ता डाॅ. वी.पी शरण, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर, केशव महतो कमलेश, संजय लाल पासवान, जोनल कोऑर्डिनेटर रमा खलखो, प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, शमशेर आलम, डाॅ. राजेश गुप्ता, राजीव रंजन प्रसाद, डाॅ. एम तौसीफ, कुमार गौरव, निरंजन पासवान उपस्थित थे.

एकता सम्मेलन सह विचार गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डाॅ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि गांधी जी की काया नहीं है लेकिन उनके विचार ऐसे है जो अभी भी अमर हैं. गांधी जी एक राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने देश में स्वतंत्रता की लडाई आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ा. इनके संघर्ष का औजार सत्य और अहिंसा थे. सत्य को इन्होंने भगवान माना और अहिंसा इनका अस्त्र था. उनका प्रिय भजन वैष्णव जन को जिनका मतलब था अच्छा इंसान वही होता है दूसरे की पीड़ा को समझता हो, हमें गांधी का अनुयायी बनना है उनके आदर्शों पर चलना है तो वैष्णव जन बनना है.

एकता सम्मेलन सह विचार गोष्ठी का संचालन प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने किया.

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड सरकार के मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि आजादी की लड़ाई में जितनी आवश्यकता महात्मा गांधी की थी, उनके विचारों-आदर्शोंकी ज्यादा जरूरत आज महसूस होती है. भारत माता की कोख से सूफी, संत, महात्मा पैदा हुए हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया है. उनका यह वचन ईश्वर अल्ला तेरे नाम, सबको सनमती दे भगवान, महात्मा गांधी जी का यह संदेश आज भी अत्याधिक प्रासंगिक है. हमें बचपन से ही सर्वधर्म सम्भाव सीखाया गया है और इसी रास्ते से हम आगे बढ़ेंगे.

शिक्षाविद् प्रो. डाॅ. वी.पी शरण ने गांधी के विचारों पर व्याख्यान देते हुए कहा कि पहले बापू बने फिर महात्मा बने और फिर राष्ट्रपिता बने. उनका असहयोग आंदोलन चम्पारण से अंग्रेजों के खिलाफ अत्याचार का सबसे बड़ा आंदोलन बना था, नमक सत्याग्रह, सवज्ञा आंदोलन और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजो बाहर का रास्ता दिखा दिया. गांधी जी के द्वारा चलाया गया आंदोलन काफी अनुशासित था और ब्रिटिश सरकार जो कि उस समय दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र उनके खिलाफ अहिंसा के ताकत लड़ना सदी के सबसे बड़ा आंदोलन का हथियार बना.

झारखंड के मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि हम इस महान विभूति को शत-शत नमन करते है, जिनके आदर्शों पर चल कर यहां तक पहुंचे हैं. गांधी जी को याद करते हुए हम यह कहना चाहते है ‘बापू हम शर्मिंदा है, आपके कातिल के विचार कभी-कभी टिमटिमात रहते है. गांधी जी के दर्शन और मार्ग को अपनाकर ही देश में प्रेम-शांति और सद्भावना आ सकती है.’

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि हम सरकार में सहभागी है इसलिए हम यह निवेदन करना चाहेंगे कि सोशल मीडिया के माध्यम से गांधी के आदर्शों को तोड-मरोड कर पेश करने वाले व्यक्तियों को चिन्हित कर दंडित किया जाए.

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के नेता निरंजन पासवान ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ समाज में फैली कुरितियों को लेकर भी उनके कार्य हमेशा याद किये जाते रहे हैं, खास कर छुआ-छूत जैसे बिमारियों को दूर भगाने में जागरूकता लाने का काम किये.

विचार-गोष्ठी में सर्वप्रथम प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता डाॅ. राजेश गुप्ता ने महात्मा गांधी के 30 अनमोल वचनों को उद्धृत किया, जिसमें विन्रम तरीके से दुनिया हो हिला सकते है और शक्ति -शारीरिक क्षमता से नहीं बल्कि एक अदम्य इच्छा शक्ति से आती है.

इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष मानस सिन्हा, संगठन प्रभारी रवीन्द्र सिंह, कुमार राजा, ईश्वर आनंद, अनादि ब्रह्म, डाॅ. गुलफाम मुजीबी, काली चरण मुंडा, मंजुर अहमद अंसारी, रौशन लाल भाटिया, प्रेम प्रकाश शाहदेव, अतिमाभ रंजन, सुरेश बैठा, डाॅ. बिनोद सिंह, मदन मोहन शर्मा, शैलेश चैबे, आदित्य विक्रम जायसवल, प्रेम कुमार, कुमुद रंजन, सुशील वर्मा, जितेन्द्र त्रिवेदी, अख्तर अली, वारिश कुरैशी, राखी कौर, इन्दिरा देवी, गुलाम जावेद, विनय सिन्हा दीपू, सुरेन्द्र सिंह, सुधीर सिंह, अमूल्य निरज खलखो, सुनिल सिंह, केदार पासवान, इन्दिरा देवी, अजय सिंह, सतीश पाॅल मुंजनी, संजय तिवारी, राजेश चन्द्र राजू, योगेन्द्र सिंह बेनी, ओम प्रकाश व्यास, इस्तियाक अहमद टूनू, मो. तौकिर, अख्तर हुसैन, जगरनाथ साहु, वेद प्रकाश तिवारी, प्रभात कुमार एवं रामानंद केशरी आदि सैकड़ो कांग्रेसजन उपस्थित थे.

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