2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसकी शुरुआत गरीबों को ध्यान में रख कर की थी. मक़सद गरीबों को कम पैसे में एसी ट्रेन की सुविधा देना था. पहले खबर आई थी कि कम पैसे में एसी ट्रेन में सफर करने का सपना साकार करने वाली गरीब रथ ट्रेन का भविष्य संकट में है और रेल मंत्रालय इस ट्रेन को बंद करने की तैयारी में है. इस कड़ी में हफ्तेभर के भीतर दो गरीब रथ ट्रेनों के कम्पोजीशन भी बदल दिए गए थे.
गरीब रथ ट्रेन पहले की तरह चलती रहेगी. इसमें ना ही किराया बढ़ाया जाएगा और ना ही कम्पोजीशन से ही कोई छेड़छाड़ होगी. नॉर्थन रेलवे की जिन दो ट्रेनों का कम्पोजीशन बदला गया था उसको फिर से 4 अगस्त से बहाल किया जाएगा.
इससे पहले पूरी तरह से थर्ड एसी इस ट्रेन में स्लीपर कोच भी जोड़े गए थे और रेलवे ने भाड़ा भी बढ़ा दिया था. पटरी पर दौड़ती गरीब रथ ट्रेन को मंत्रालय बेपटरी करने की तैयारी में था. शुरुआत काठगोदाम से जम्मू और कानपुर सेंट्रल गरीब रथ से हो चुकी थी. उसके रेक बदले गए थे और पूरी तरह से थर्ड एसी ट्रेन में स्लीपर के डिब्बे भी जोड़ दिए गए थे.
फिलहाल इन ट्रेनों की तादाद 26 है. जब रेल राज्यमंत्री सुरेश अगड़ी से गरीब रथ ट्रेन को बंद करने को लेकर सवाल पूछा गया तो जवाब गोल गोल मिला और उन्होंने कहा था जब, जिसको जो सुविधा चाहिए वो दे रहे हैं. सबको एसी चाहिए सबको एसी दे रहे हैं. भारत बदल रहा है. भाड़े को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है. जब मिलेगी तो देखेंगे.

