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बाल कुपोषण से उबरने के लिए शिशुओं को कराएं पूरक आहार

by bnnbharat.com
September 11, 2020
in समाचार
बाल कुपोषण से उबरने के लिए शिशुओं को कराएं पूरक आहार
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सही पोषण से शिशुओं में होता है शारीरिक व मानसिक विकास

आंगनवाड़ी केन्द्रों से मिल सकता है पोषण सम्बंधित जानकारी

पांच सूत्रों से खत्म होगा कुपोषण

कटिहार: शिशु के जन्म से छह माह पश्चात उन्हें पोषण देना शुरू कर दिया जाता है. अगर शिशु को सही समय पर सही पोषण न मिल सके तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है. शिशुओं में कुपोषण की मात्रा को कम करने के लिए सरकार द्वारा पूरे सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है.

पूरे माह के दौरान लोगों को विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से शिशुओं में कुपोषण से होने वाली खतरों की जानकारी देने के साथ साथ सही पोषण सम्बंधित जानकारियाँ दी जाती है. सही पोषण के मिलने से ही शिशुओं में कुपोषण की सम्भावना खत्म हो सकती है. इसलिए बाल कुपोषण को दूर करने के लिए पोषण की सही जानकारी का होना जरूरी है.

सही पोषण से शिशुओं में होता है शारीरिक व मानसिक विकास :

आईसीडीएस जिला कार्यक्रम पदाधिकारी बेबी रानी ने बताया कि शिशुओं की उम्र बढ़ने के साथ ही उनके शरीर में भी वृद्धि का होना जरूरी है. उम्र के साथ शिशु की लंबाई, वजन के साथ साथ उनकी मष्तिष्क व तंत्रिका तंत्र का भी विकास जरूरी होता है. इसके लिए शिशु को स्तनपान के साथ सही पूरक का दिया जाना जरूरी है.

छह माह के बाद से शिशुओं को मां के दूध के साथ पौष्टिक आहार देना चाहिए. आहार के रूप में दलिया, खिचड़ी, हलवा, दाल इत्यादि का उपयोग किया जा सकता है. पूरक आहार के लिए घर में मौजूद खाद्य पदार्थों जैसे गेहूं का आटा, सूजी, चावल, बाजरा, दाल ज्यादा उपयुक्त होगा.

इसके अलावा भोजन में घी या तेल का भी उपयोग करना चाहिए. अंडा, मछली, फल, सब्जी इत्यादि भी शिशु को सुपाच्य बना कर दिया जा सकता है. सही पोषण के मिलने से ही बढ़ती उम्र के साथ साथ शिशुओं के मानसिक व शारीरिक क्षमता का विकास हो सकता है.

आंगनवाड़ी केन्द्रों से मिल सकता है पोषण सम्बंधित जानकारी :

बेबी रानी ने बताया कि पोषण सम्बंधित जानकारी के लिए लोग अपने क्षेत्र के आंगनवाड़ी केन्द्रों पर जा सकते हैं. आंगनवाड़ी सेविका द्वारा अपने क्षेत्र के शिशुओं के पोषण के लिए नियमित कार्य किया जाता है.

प्रत्येक माह के 19 तारीख को आंगनवाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस मनाया जाता है, जहां छह माह के शिशुओं के अन्नप्राशन करने के साथ ही शिशुओं को कैसे भोजन दिए जाएं इसकी जानकारी माताओं को दी जाती है, परन्तु कोरोना काल को देखते हुए आंगनवाड़ी सेविकाएं घर-घर जाकर अन्नप्राशन करवाने के साथ ही लोगों को पोषण सम्बंधित जानकारी पहुंचा रही है. पोषण माह के दौरान सभी प्रखंडों में पोषण परामर्श केंद भी खोला गया है जहां से लोगों को पोषण सम्बंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकती है.

पांच सूत्रों से खत्म होगा कुपोषण :

पोषण अभियान के जिला समन्वयक अनमोल कुमार गुप्ता ने बताया कि कुपोषण से बचने के लिए हम सभी को “पोषण के 5 सूत्र” सुनहरे 1000 दिन (गर्भावस्था से शिशु के 2 साल तक), एनिमिया से बचाव, डायरिया से बचाव, स्वच्छता एंड हैण्डवास, पौष्टिक आहार को अपनाना होगा. इन पाँच सूत्रों को अपनाकर समाज से कुपोषण को भगाया जा सकता है.

हमारी आंगनबाड़ी सेविका इन्हीं 5 सूत्रों को समाज के हर घर तक पोषण अभियान के माध्यम से गृह भ्रमण कर जागरूक कर रही है. पोषण अभियान के सभी कर्भी पोषण सेनानी के नाम से पुकारे जा रहे.

और एक काम देश के नाम सही पोषण देश रौशन नारो के साथ जागरूकता फैला रहे है. और लोगों से किचन गार्डन (अपनी क्यारी- अपनी थाली) को अपने पर सहयोग भी कर रहे.

जिले की यह है वर्तमान स्थिति :

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में कटिहार जिला में 62.4 प्रतिशत शिशु छह माह तक केवल स्तनपान करते हैं. 6 माह से 8 माह के केवल 25.6 प्रतिशत शिशुओं में ही स्तनपान के साथ पूरक आहार की शुरुआत हो पाती है. 6 माह से 23 माह के बीच 7.9 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त आहार मिल रहा है. जल्द ही कटिहार मे पोषण के लक्ष्य को प्राप्त करने की लक्ष्य रखी गई है.

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