ज्योत्सना,
खूंटी: चुनाव के कई रंग देखने की मिल रहे हैं. कभी नक्सलवाद और पत्थलगड़ी को लेकर देशभर में सुर्खियों में रहने वाले खूंटी जिले में चुनावी पर्व के अलग नजारे देखने को मिल रहे हैं.
महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जन्मस्थल खूंटी में चुनावी रंग में रंगे कार्यकर्ता तो दिख ही रहे हैं साथ ही चुनावी कार्यक्रमों में आदिवासी संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है.
चुनाव कार्यालय का उद्घाटन हो या चुनावी सभा नेता कार्यकर्ता आदिवासी संस्कृति के साथ घुल मिलकर कर ढोल नगाड़े और बांसुरी की धुन पर ताल ठोंक रहे हैं. यहां चलना ही नृत्य है और बोलना ही संगीत, और यही चुनावी समर में देखने को मिल रहा है.
झारखण्ड के लोक कलाकार जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर पूरे उत्साह के साथ चुनावी महापर्व में लोगों की भागीदारी का संदेश दे रहे हैं. रंग बिरंगे परिधानों से सजे मुंडा आदिवासी कलाकार अपने गीत संगीत के माध्यम से वोट की अपील कर रहे हैं. इनकी ये अपील स्थानीय गीत संगीत के माध्यम से स्पष्ट रूप से झलक रही है.
कभी खूंटी की फिजाओं में नक्सली और पत्थलगड़ी कर समानांतर सरकार चलाने की बात करने वाले इलाके में अब ढोल बांसुरी के लय में लोगों को बढ़ चढ़ कर वोट के पर्व में भागीदारी का संदेश दे रहे हैं.

