रांची: प्रदेश कार्यालय हरमू में राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने प्रेस वार्ता की. उन्होंने कहा कि 2021 में प्रस्तावित जनगणना केंद्र सरकार ने जाति आधारित जनगणना नहीं कराना चाहती है. इसलिए इस मुद्दे को ढ़कने के लिए अनावश्यक रूप से पूरे देश में सीएए, एनआरसी और एनपीआर का झमेला खड़ा किया है, ताकि ओबीसी समुदाय इस मुद्दे पर आक्रोशित ना हो आंदोलन ना करें.
वर्षों से ओबीसी समुदाय की मांग है कि जाति आधारित जनगणना हो यूपीए सरकार ने 2011 में जाति आधारित जनगणना का कॉलम नहीं दिया था पर उन्होंने सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना कराई. जिसका रिपोर्ट 2014 में त्रुटिपूर्ण कह कर उक्त रिपोर्ट को प्रकाशित नहीं किया और अब जबकि 2021 के लिए जनगणना कराई जा रही है उसे जाति आधारित नहीं की जा रही है.
राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के केंद्र की सरकार पिछड़ों का हक देना नहीं चाहती है. इसलिए प्रस्तावित जनगणना में ओबीसी जाति का कॉलम नहीं दिया गया है. जब कभी भी ओबीसी समुदाय का विकास की बात आती है तो गिनती पर आकर ठहर जाती है.
पिछले दिनों न्यायालय द्वारा ओबीसी समुदाय का गिनती की बात हुई थी. सरकार डाटा नहीं दे पाई. जिससे ओबीसी समुदाय के डेवलपमेंट के लिए कोई भी उचित बजट नहीं दिया जाता है.
झारखंड में ओबीसी समुदाय का गिनती के नाम पर रघुवर सरकार ने 5 साल तक ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के मुद्दे को टालते रहे गत 2019-2021 के केंद्रीय बजट में 52% आबादी वाले ओबीसी समुदाय का मात्र 1% रकम देना ओबीसी समुदाय के प्रति नाइंसाफी है. ऐसा इसलिए हो रहा है कि अभी तक ओबीसी समुदाय की गिनती नहीं हुई है.
प्रेस वार्ता में प्रदेश महासचिव मोहम्मद अल्तमस, केंद्रीय संगठन सचिव शत्रुघन कुमार राय, छात्र मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष नवीन साहू और एसएन सिंह कुशवाहा उपस्थित थे.

