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निजी स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए सरकार कोष बनाये-आलोक दूबे

लॉकडाउन संकट से निपटने के लिए पासवा ने सहयोग की अपील की

by bnnbharat.com
June 28, 2020
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निजी स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए सरकार कोष बनाये-आलोक दूबे

निजी स्कूलों के शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए सरकार कोष बनाये-

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रांची :  प्राईवेट स्कूल एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिऐशन, पासवा ने देश भर में संचालित 2 लाख निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षकेत्तेर कर्मचारियों के समक्ष लॉकडाउन में उत्पन्न संकट को लेकर प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराने को लेकर 20लाख पत्र लिखने का निर्णय लिया है. पासवा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन के लिए कोष उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। प्राईवेट स्कूल एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिऐशन की झारखंड इकाई ने भी 2 लाख पत्र लिखने का निर्णय लिया है.
पासवा के झारखंड इकाई के अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने पासवा के अध्यक्ष ने बताया कि झारखंड से लगभग दो लाख लोग प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कोष की व्यवस्था करने का आग्रह करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान राज्य में संचालित 20 हजार निजी विद्यालयों, उनके प्रबंधकों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के समक्ष लॉकडाउन के कारण संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। उन्होंने बताया कि मार्च महीने से फीस नहीं आने के कारण सभी प्राईवेट स्कूल और उनसे जुड़े शिक्षक एवं कर्मचारीगण वेतन नहीं मिलने से भुखमरी के कगार पर आ गये हैं.
आलोक कुमार दूबे ने बताया कि लॉकडाउन में पिछले चार-पॉंच महीने से फीस नहीं आई है, जिसके कारण शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को वेतन दे पाना असंभव हो गया है। उन्होंने कहा कि वेतन के अतिरिक्त हर विद्यालय के अन्य मासिक खर्चे भी हैं जैसे बिलि्ंडग का किराया, बैंक को लोन किश्त, मैटेनेंस, गाड़ियों का किश्त और मैंटेंनेंस, बिजली का बिल टैक्स आदि जिसमें किसी प्रकार की कोई छूट नहीं दी गई है। इन परिस्थितियों में प्राईवेट स्कूलों के प्रबंधक, शिक्षक एवं कर्मचारी अत्यंत मानसिक तनाव में हैं और केन्द्र सरकार से सहायता ने मिलने पर कोई जानलेवा कदम भी उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है, आर्थिक रूप से पिछले चार-पॉंच महीने से उनकी माली हालत दयनीय हो चुकी है। अभिभावकों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनसे फीस भी नहीं मांगा जा रहा है। इसके बावजूद प्राईवेट स्कूल के शिक्षक इस स्थिति में भी कड़ी मेहनत करके ऑनलाईन शिक्षा दे रहे हैं और बिना फीस के उन्हें वेतन भी नहीं मिल रहा है। इसलिए सरकार तत्काल उन्हें सहायता उपलब्ध कराएं.

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