रांची: राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा है कि भारत सरकार झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. हमारे झारखंडी प्रवासी छात्र-छात्राएं एवं मजदूर भाई-बहन काफी लंबे समय से अन्य राज्यों में क्वारंटीन हैं. इसके बावजूद अपने घर से दूर रहने को विवश हैं, जबकि योगी सरकार हजारों लोगों को सैकड़ों बसें भेजकर मंगा रही है.
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उन्होंने कहा है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश संख्या-40-3/2020-डीएम-आई(ए) दिनांक 15.04.2020 के क्रम संख्या-1 के कंडिका (v) में स्पष्ट उल्लेख है कि मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर अन्य किसी भी परिस्थिति मे एक राज्य से दूसरे राज्य तथा एक जिले से दूसरे जिले के बीच किसी भी प्रकार का कोई भी आवागमन/परिचालन नहीं होगा परंतु योगी सरकार ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश को धत्ता बताते हुए सैकड़ों बसों से हजारों लोगों को अपने राज्य में मंगा लिया.
योगी सरकार द्वारा भारत सरकार के आदेश एवं संपूर्ण लाॅकडाउन का माखौल उ़डाया जा रहा है. इन सब गतिविधियों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे योगी जी एक समानांतर सरकार चला रहे हो और जैसे उत्तर प्रदेश भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हो.
ऐसी दोहरी नीति क्यों ?
झारखंडी प्रवासी छात्र/मजदूर लंबे क्वारंटीन के बाद भी घर से दूर रहने को विवश हैं जबकि योगी सरकार सैकड़ों बसें भेजकर हजारों को मंगवा रही है।
MoHA का गाइडलाइन सिर्फ हमारे लिया था क्या ??
माननीय प्रधानमंत्री कृपया 🙏🙏@HemantSorenJMM @narendramodi @PMOIndia pic.twitter.com/VxMBTbCk6O— Mithilesh Kumar Thakur (@MithileshJMM) April 18, 2020
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से यह स्पष्ट निर्देश था कि ‘‘पूरी निष्ठा के साथ 3 मई तक लाॅकडाउन के नियमों का पालन करें, जहां हैं, वहीं रहें, सुरक्षित रहें’’ परंतु योगी सरकार ने उक्त आदेश का माखौल उड़ाते हुए कार्य किया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय का आदेश क्या सिर्फ गैर भाजपा शासित राज्यों के लिये है. इस संबंध में मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को टैग कर के ट्वीट भी किया है.
मंत्री ने कहा कि अन्य जिलों की तुलना में गढ़वा जिले के ज्यादा लोग अन्य राज्यों में फंसे हुये हैं. उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से दूसरे राज्यों में फंसे हुये झारखंड के प्रवासी छात्र-छात्राओं एवं मजदूर भाई-बहनों को वापस बुलाने की मांग की है.

