-टेट शिक्षकों के सेवा शर्त देने के मामले पर सरकार शिक्षकों को कर रही गुमराह.
-सरकार के इस ढपोरशंखीे सेवा शर्त को शिक्षक न्यायालय में देंगे चुनौती
मुंगेर: टेट शिक्षकों को बिहार के डबल इन्जन सरकार ने धोखा दिया. कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ ) शिक्षकों ने अपने दम पर वाद द्वारा पटना उच्च न्यायालय से लड़कर जीता है, सरकार के रहमोकरम पर नहीं. उक्त बातें टीईटी शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राहुल देव सिंह ने कही.
क्या है मामला
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा गाँधी मैदान में शिक्षकों के सेवा शर्त एवं कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के सन्दर्भ में दिये गये वक्तव्य पर टीईटी शिक्षकों में काफी उदासीनता बढ़ गई. जिस पर टीईटी शिक्षकों संघ ने प्रेस रिलीज जारी कर इस पर कड़ी भर्त्सना एवं घोर निन्दा की है.
वही टीईटी शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक अमित विक्रम ने कहा की सरकार ने हड़ताल समाप्ति के वक्त लिखित आश्वासन दिया था कि कोरोना के सामान्य स्थिति होने पर सभी शिक्षक संगठनों से वार्ता कर शिक्षकों के सेवा शर्त पर सुझाव लेकर आम सहमति बनाकर लागू किया जायेगा एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायादेश के अनुरूप टीईटी शिक्षकों को बेहतर वेतन देने की व्यवस्था किया जायेगा. परन्तु सरकार ने वादाखिलाफी कर कोरोना का बहाना बनाकर सोची समझी साजिश के तहत एकतरफा कार्य प्रणाली के तहत टीईटी शिक्षकों को अपमानित करने के उददेश्य से हिटलरशाही सेवा शर्त लागू कर रही जिसमें टीईटी शिक्षकों के प्रति इनकी कुत्सित मानसिकता स्पष्ट रूप से झलकती है.
सरकार अगर इसमें सुधार कर पुराने शिक्षकों की तरह सेवा शर्त लागू नही करती है तो टीईटी शिक्षक संघ सरकार के नये चायनीज सेवा शर्त को न्यायालय में चुनौती देने को बाध्य होगा. साथ ही शिक्षकों का राज्य स्तरीय आंदोलन की रूप रेखा तय कर आगामी चुनाव से पूर्व पटना में आक्रोशपूर्ण आंदोलन करने को टीईटी शिक्षक संघ बाध्य होगा.
वही संघ के मुंगेर जिलाध्यक्ष सह प्रमण्डलीय संयोजक राहुल देव सिंह ने बताया की बिहार में डबल इन्जन की सरकार निरंकुश व तानाशाह हो गयी है दरअसल निवर्तमान सरकार ही बिहार में शिक्षा का गुणात्मक विकास में सबसे बड़ी बाधक है. किसी भी राज्य के विकास में शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माता का अहम योगदान होता है परन्तु राज्य की शिक्षा केवल कागजों पर सिमट कर रह गयी है. सरकारी विद्यालयों में पठन पाठन छोङ विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करने का स्थल मात्र बनकर रह गया है.
शिक्षकों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का लाभ निवर्तमान निरंकुश सरकार नहीं दे रही बल्कि शिक्षकों ने अपने दमखम से पटना उच्च न्यायालय में लड़कर जीत हासिल कर लिया है. अब जब चुनाव नजदीक है तो सरकार इसे अपना झूठा उपलब्धि बताकर शिक्षकों को गुमराह कर वोट बैंक की राजनीति को सुदृढ़ करना चाहती है. जिससे बिहार के तमाम शिक्षक आक्रोशित एवं उद्वेलित है. निवर्तमान सरकार बिहार में शिक्षा के नाम पर घृणित राजनीति कर रही है. शिक्षा के नाम पर पोशाक,छात्रवृत्ति, साईकल,चावल बांटकर केवल वोट बैंक की घृणित राजनीति कर रही. सरकार को शिक्षा से कोई लेना देना नहीं है.
वहीं जिला संयोजक राकेश कुमार एव जिला महासचिव प्रभाकर भारती ने बताया की सरकार केवल लोक लुभावन बातों से शिक्षकों को भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं जिसे शिक्षक बखूबी समझ रहे हैं. आगामी चुनाव में शिक्षक अपने अपने वोट से अपने अपमान का बकाया भुगतान करेंगे एवं शिक्षा एवं शिक्षकों के खिलाफ कार्य करने वाले सरकार को जजड से उखाड़ फेंकेगे.
वहीं इस संबंध में जिला उपाध्यक्ष विकास कुमार एवं जिला सचिव संदीप कुमार ने संयुक्त रूप से बताया की सरकार सत्ता मद में चूर होकर बिहार के शैक्षणिक भविष्य से खिलवाड़ कर रही है जिसे बिहार के शिक्षा का भविष्य अंधकारमय हो गया है.
टीईटी शिक्षकों के संवैधानिक अधिकारों एव उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के अनुरूप टीईटी शिक्षकों का सेवा शर्त सरकार को हर हाल में देना होगा अन्यथा इसबार का विधानसभा चुनाव में बिहार के सभी शिक्षक अपने-अपने परिवार सहित सरकार के खिलाफ मतदान कर निवर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिए है.

