रांची: राज्य गठन के बाद से ही आदिवासियों की जमीन की खरीद बिक्री धड़ल्ले से जारी है. आदिवासियों की सुरक्षा कवच सीएनटी/एसपीटी एक्ट का घोर उल्लंघन कर आदिवासी के जमीन की बड़े पैमाने पर लूट हो रही है.
आदिवासियों की पहचान उनकी जमीन से जुड़ी है ऐसे में पूर्वजों द्वारा बचाए गए धार्मिक एवं सामाजिक भूमि का भी बेचा जाना दुखद है. विशेषकर आदिवासियों की धार्मिक भूमि सरना, जाहेरथान, देशवाली, देवस्थान, मसना, हड़गडी, डालीकतारी भुतखेता, पहनाई, महतोवाई, पइनभोरा, कोटवारी नौकराना, जतरा स्थल, अखरा, धुमकुड़िया की भूमि पर भी भूमाफियाओं की पैनी नजर है कि ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं, जिसमें भू-माफिया एवं अंचल कर्मियों की मिलीभगत से धार्मिक सामाजिक भूमि का अवैध तरीके से खरीद बिक्री की गई है.
धार्मिक सामाजिक भूमि की संरक्षण हेतु सरकार सर्वे कराकर संबंधित गांव के नाम से खतियान एवं पंजी टू में नाम दर्ज कराए.
ज्ञात हो कि पांचवी अनुसूची के तहत अनुच्छेद 244(1) में आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासन की व्यवस्था का उल्लेख है, पांचवी अनुसूची का सार यह है कि इसके तहत आदिवासी संस्कृति, भाषा, जीवनशैली और अधिकारों को राज्यपाल की निगरानी में संवैधानिक संरक्षण दिया गया है, तथा राज्य के नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 46 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के शिक्षा एवं सुरक्षा की बात कही गई है. हम सभी जानते हैं कि आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा किए बगैर आदिवासियों की सुरक्षा नहीं किया जा सकता.

