दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों को 15 दिनों के भीतर उनके घर भेजने का आदेश केंद्र सरकार को दिया है. साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत ने ये भी कहा है कि आपदा प्रबंधन क़ानून, 2005 के तहत लॉकडाउन का कथित तौर पर उल्लंघन करने के आरोप में प्रवासी मजदूरों के ख़िलाफ़ जितने भी केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लेने का विचार किया जाए.
जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई की. मई के आख़िरी हफ़्ते में सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान फंसे हुए मजदूरों पर खुद ही सुनवाई करने का फ़ैसला किया था. बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
इस महत्वपूर्ण आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि श्रमिक ट्रेनों की मांग किए जाने की सूरत में रेलवे 24 घंटे के भीतर इसका इंतज़ाम करेगा. साथ ही श्रमिकों के लिए जो भी योजनाएं चलाई जा रही हैं, रेलवे उन्हें मुहैया कराने और उनके प्रचार की व्यवस्था करेगा.
अपने आदेश में जस्टिस भूषण ने कहा, “हम कुछ आदेश जारी कर रहे हैं. कुछ शपथपत्र दायर करने की ज़रूरत पड़ेगी. सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित प्रदेशों की सरकारों को फंसे हुए मजदूरों की पहचान करनी है और उन्हें 15 दिनों के भीतर उनके घर वापस भेजना है. श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का इंतज़ाम 24 घंटों के भीतर करना होगा.”
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में केंद्र और राज्य सरकारों को सुनियोजित तरीके से प्रवासी मजदूरों की पहचान करने के लिए भी कहा गया है.

