पंकज सिन्हा,
चंदवा: झारखंड राज्य किसान सभा लातेहार ने कामता मे हरियाणा के भाजपा नेतृत्व वाली मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार का पूतला फूंका सभा की, खट्टर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की. इसमें शामिल किसान खट्टर और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
सभा में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष अयुब खान ने कहा है कि हरियाणा भाजपा सरकार द्वारा पारित किए गए किसान विरोधी तीन अध्यादेशों के खिलाफ हरियाणा के पिपली में किसान मजदूर गुरुवार को प्रदर्शन कर रहे थे.
इसमें बड़ी संख्या में किसान व्यापारी और मजदूर शामिल थे. इसी क्रम में पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया, इसमें कई किसान मजदूर घायल हो गए. उन्होंने कहा कि सरकार ने अन्नदाता किसानों पर लाठीचार्ज कर अपनी कायरता दिखाई है. सरकार कोरोना वायरस महामारी के नाम से किसानों के आंदोलन को दबाना चाहती है. लेकिन किसान चुप नहीं बैठेंगे और सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार कृषि सुधार लाने के नाम पर अध्यादेश लाकर किसानों को उग्र विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर कर रही है, इसके लिए पूरी तरह से हरियाणा भाजपा सरकार जिम्मेदार है. पहले व्यापारी फसलों को किसानों से औने पौने दामों में खरीदकर उसका भंडारण कर लेते थे और कालाबाजारी करते थे, उसको रोकने के लिए 1955 में एक्ट बनाया गया था, जिसके तहत व्यापारियों द्वारा कृषि उत्पादों के एक लिमिट से अधिक भंडारण पर रोक लगा दी गयी थी.
अब हरियाणा सरकार ने एक अध्यादेश लाया है जिसके तहत आलू, प्याज़, दलहन, तिलहन व तेल के भंडारण पर लगी रोक को हटा लिया गया है. सरकार की इस नीति से किसानों को नुकसान होगा. हमारे देश में 85% लघु किसान हैं, किसानों के पास लंबे समय तक भंडारण की व्यवस्था नहीं होती है, यानी यह अध्यादेश बड़ी कम्पनियों द्वारा कृषि उत्पादों की कालाबाजारी के लिए लाया गया है. कम्पनियां और सुपर मार्केट अपने बड़े-बड़े गोदामों में कृषि उत्पादों का भंडारण करेंगे और बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगे, इस बदलाव से कालाबाजारी घटेगी नहीं बल्की बढ़ेगी, जमाखोरी बढ़ेगी.
इस नए अध्यादेश के तहत किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन के रह जायेगा, लोकतंत्र में जनता की आवाज को लाठीतंत्र से दबाया नहीं जा सकता. लोकतंत्र में हर किसी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि अन्नदाता अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं,
कोरोना काल में किसान विरोधी 3 अध्यादेश लाकर सरकार ने खुद किसान को सड़क पर आने के लिए मजबूर किया है, बिना सदन में चर्चा और एमएसपी की गारंटी के कोई भी अध्यादेश किसान हित में नहीं हो सकता है. अगर सरकार व्यवस्था में कोई परिवर्तन करना चाहती है तो उसे मंडी और एमएसपी व्यवस्था के संरक्षण की गारंटी देनी होगी, बीजेपी अपने वादे के मुताबिक, स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करे.
सरकार कोरोना का हवाला देकर किसान की आवाज दबाना चाहती है, लेकिन वो इसी कोरोना काल में किसानों पर 3 अध्यादेश थोप रही है, अगर उसे किसान और कोरोना की इतनी ही चिंता है तो वो 3 अध्यादेशों को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है.
एक तरफ बीजेपी – जेजेपी गठबंधन सरकार किसानों को चौतरफा मार मारने में लगी है और दूसरी तरफ वो किसान की आवाज को बंद कर रही है, उन्होंने कहा कि किसान जब भी अपने हक की आवाज बुलंद करता है तो उसे लाठियों से दबाने की कोशिश की जाती है.
कहा कि अन्नदाता करोड़ों भारतीयों का पेट भरता है, उसके पेट या शरीर पर लाठी चलाने का अधिकार किसी को नहीं है, सरकार ने लाठी चार्ज कर अपनी कायरता दिखाई है, सभा में हरियाणा की खट्टर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई है.
सभा में साबीर खान, जीतन गंझु, राहुल गंझु, गुडु गंझु, मकबुल खान, गोपी गंझु, पैंतु गंझु, नसीम खान, फंटु खान, राजेश गंझु, फहमीदा बीवी, सीटी देवी, लक्षमनीयां देवी, फुलमनियां देवी, गीता देवी, फुलची देवी, बीगनी देवी, सांति देवी समेत कई लोग शामिल थे.

