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महागठबंधन : फिर से दिल मिलाने की कोशिश, पॉलिटिकल स्टंट जारी

by bnnbharat.com
September 11, 2019
in Uncategorized
महागठबंधन : फिर से दिल मिलाने की कोशिश, पॉलिटिकल स्टंट जारी
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रवि भारती

रांचीः झारखंड में विधानसभा का शंखनाद होने ही वाला है. एक बार फिर से विपक्षी खेमें में सुगबुगाहट बढ़ रही है. एक दूसरे से दिल मिलाने की भी कोशिश जारी है. सुबोधकांत सहाय और झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को इस मसले पर गुफ्तगु भी की है. कयास यह लगाया जा रहा है कि फिर से महागठबंधन के सभी दलों को एकसूत्र में पिरोया जाए. सभी राजनीतिक दलों के लिए अग्नि परीक्षा की घड़ी है. विपक्षी दलों में कमोबेश एक ही स्थिति बनी हुई है. कोई अंदरूनी झगड़े से परेशान है, तो कोई अपनी धार तेज करने में जुटा है. सभी दल महागठबंधन की वकालत भी कर रहे हैं, तो दबी जुबां से अकेले दम पर चुनाव लड़ने का भी दावा कर रहे हैं. पॉलिटिकल स्टंट जारी है. संगठन की मजबूती और जनाधार बढ़ाने पर सभी का फोकस भी है. पेश है बीएनएन भारत की एक रिपोर्ट-

झाविमो के लिए है अग्नि परीक्षा

झाविमो के लिए अग्नि परीक्षा होनेवाली है. उनके घर में जिस तरह से बातें सार्वजनिक हो रही है, उनके लिए परेशानी खड़ा कर सकती है. विधायक प्रकाश राम को राज्यसभा चुनाव के बाद किनारे कर दिया गया है. संगठन की मुख्य ताकत बाबूलाल मरांडी संगठन को खड़ा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं. लगभग नौ साल के राजनीतिक सफर में पार्टी को कई कद्दावर नेता हाथ लगे. भाजपा के डॉ दिनेश षाडंगी, झामुमो के दुलाल भुइयां, शिवलाल महतो, गौतम सागर राणा, घुरन राम, प्रकाश राम, जोबा मांझी, चंद्रनाथ भाई पटेल, अनिल मुर्मू ने झाविमो का दामन थामा. लेकिन, सभी ने किनारा कर लिया. खुद बाबूलाल और प्रदीप यादव लोकसभा चुनाव हार गए. पार्टी के कद्दावर नेता बंधु तिर्की पर जांच की आंच है. ऐसे में संगठन को धार देना बाबूलाल के लिए बड़ी चुनौती होगी.

Babulal Marandi

 

हाशिये पर जदयू का वजूद

झारखंड में जदयू का वजूद हाशिये पर है. तीर निशान वाली इस पार्टी का तीर कुंद हो गया है. झारखंड में पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी सवाल खड़ा हो गया है. सालखन मुर्मू पर झारखंड की जिम्मेवारी है. हालांकि बिहार के सीएम नीतीश कुमार झारखंड में जान फूंकने की कोशिश में लगे हैं. पार्टी के पदाधिकारी इसे पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत है, पर राज्यस्तरीय चेहरा नहीं है. बिहार में एनडीए का अहम पार्टनर होने के बावजूद भाजपा की हिकारत का सामना कर रहा है. नतीजतन पार्टी को बचाने की कवायद है.

Salkhan Murmu

गुटबाजी है कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी

 

कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है. संगठन की यह सबसे बड़ी कमजोरी है. लंबे समय से सत्ता से दूर रहने और गुटबाजी का नतीजा है कि धरातल पर पार्टी की ठोस गतिविधियां नहीं दिख रही. प्रदेश अध्यक्ष तक के चयन में केंद्रीय नेतृत्व की परमिशन जरूरी है. वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव के पास सभी को एकजुट करने की चुनौती है. पार्टी में तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है. अलग-अलग गुट अपनी ही राग अलाप रहे हैं. जिसका उदाहरण समय-समय पर देखने को मिलता है.

Rameswar

क्या है कांग्रेस की परेशानी

 

सरकार में नहीं रहने के कारण कार्यकर्ता बिखर गये हैं. कई नीचे स्तर के कार्यकर्ता दूसरे दलों के लिए काम करने लगे हैं. चुनाव के समय टिकट का बंटवारा राष्ट्रीय स्तर पर होता है. जुगाड़ व्यवस्था ज्यादा है, जिसका नतीजा है कि पार्टी के पुराने लोगों का मोह भंग होता जा रहा है. पार्टी का राज्यस्तरीय आक्रामक तेवर कम दिख रहा है. बड़े कार्यक्रम का आयोजन लंबे समय तक नहीं होता है.

Subodhkant

भाजपा की सेंधमारी है झामुमो की सबसे बड़ी चिंता

झामुमो के लिए स्थिति यह हो गयी है कि अगर एकला चला, तब निशाने पर तीर नहीं लग पायेगा. इसका भान झामुमो को भी है. झामुमो के लिए संथाल और कोल्हान गढ़ माना जाता है. संथाल में भाजपा की उपस्थिति उसकी परेशानी बढ़ा सकती है. लोकसभा चुनाव में भाजपा झामुमो के गढ़ में सेंधमारी कर चुकी है. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को भी हार का समाना करना पड़ा. ऐसे में झामुमो अपनी बदलाव यात्रा से कैडर व लोगों को एकजुट करने में जुटा है.

Hemant Shoren

 

झामुमो की परेशानी का कारण

• संथाल और कोल्हान में अन्य दलों की सेंधमारी
• हेमंत के बढ़ते कद को पार्टी के कुछ कद्दावर नेता नहीं पचा पा रहे
• गठबंधन नहीं होने की स्थिति में जनाधार घटेगा

राजद का घटता जनाधार

राजद के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उसका जनाधार घट रहा है. महिला, युवा, छात्र संगठन भी कमजोर हो चला है. यह राजद के लिए परेशानी का सबब हो सकता है. पलामू, देवघर और चतरा में राजद का जनाधार तो है, लेकिन बड़े नेता का कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है. राजद ने अब तक कोई बड़ा अभियान भी नहीं चलाया है.वहीं राजद भी गुटबाजी का शिकार हो गया है. गौतम सागर राणा ने अलग गुट बना लिया है.

Tejaswi Yadav

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