गुमला: झारखंड में होने वाले विधानसभा के प्रथम चरण के चुनाव में गुमला में भी 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. इस विधानसभा सीट से भाजपा के विजयरथ को रोकने की जुगत में झामुमो लगा है.
भाजपा ने अपने विधायक पर भरोसा नहीं किया. यहां से प्रत्याशी बदल दिया. गठबंधन के तहत यह सीट झामुमो के खाते में आया और पार्टी ने पूर्व विधायक पर भरोसा जताया.
कमल को खिलने से रोकने में तीर-धनुष कितना कामयाब हो पाती है, यह मतगणना के दिन 23 दिसंबर को पता चलेगा. आम तौर पर गुमला में भाजपा, झामुमो और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होती रही है. इस बार कांग्रेस और झामुमो में गठबंधन है.
लोकसभा चुनाव में भाजपा पीछे
गुमला लोहरदगा संसदीय सीट का हिस्सा है. लोकसभा चुनाव में यहां से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत जीते. हालांकि लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र से उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार की अपेक्षा कम वोट मिले. भाजपा के मुकाबले कांग्रेस करीब सात हजार वोट से आगे थी.
ये प्रत्याशी हैं चुनाव मैदान में
भाजपा ने गुमला से शिव शंकर उरांव को टिकट नहीं दिया. मिसिर कुजूर को प्रत्याशी बनाया है. झामुमो से भूषण तिर्की उम्मीदवार हैं. झाविमो से राजनील तिग्गाे, भाकपा से विश्वनाथ उरांव, राष्ट्रीय देशज पार्टी से खुदी भगत दुखी, जनता कांग्रेस से दीपक धनवार, भारतीय जनजातीय पार्टी से नीलांबर प्रकाश भगत, जदयू से प्रदीप उरांव, झारखंड पार्टी से सरोज हेम्रम चुनाव में खड़े हैं.
ये रहे हैं विधायक
गुमला विधानसभा क्षेत्र में छह बार भाजपा, तीन बार कांग्रेस और दो बार झामुमो ने जीत दर्ज की है. 1951 में सुकरु भगत विधायक बने. 1957 में सुकरा उरांव,1962 में पुनई उरांव,1967 में रोपना उरांव,1969 में रोपना उरांव,1972 में बैरागी उरांव,1977 में जयराम उरांव,1980 में बैरागी उरांव,1985 में बैरागी उरांव,1990 में प्रो0 जितवाहन बड़ाईक,1995 में प्रो0 बरनार्ड मिंज, 2000 में सुदर्शन भगत, 2005 में भूषण तिर्की, 2009 में कमलेश उरांव और 2014 में शिवशंकर उरांव विजयी रहे.

