रांचीः प्रदेश भाजपा की नई कमेटी को लेकर कई तरह की चर्चाएं आम हो गई हैं. खास कर दो समधि भी नई कमेटी में पद पाने के लिए टकटकी लगाए हुए थे. यह कहानी है पूर्व डीडीपी डीके पांडेय और पूर्व प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्र की. दोनों समधि हैं.
हुआ यूं कि जब डीके पांडेय डीजीपी थे, तब वे बीजेपी के प्रवक्ता की तरह पेश आते थे. रघुवर सरकार का गुणगाण करने से भी नहीं थकते. यहां तक की एक प्रेस कांफ्रेंस में भी पार्टी का नारा लगाने से भी नहीं चूके.
विधानसभा चुनाव में टिकट की आस लेकर भाजपा में शामिल हुए. टिकट भी नहीं मिला. अब नई प्रदेश कमेटी में भी तरजीह नहीं दी गई. उल्टे समधि से भी विवाद और नए मकान में लोचा हो गया.
वहीं डीके पांडेय के समधि गणेश मिश्र बीजेपी में प्रशिक्षण प्रमुख के पद पर थे. निरसा से चुनाव भी लड़े थे, इस बार भी वे टिकट की आस लगाए बैठे थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला.
अब तो यह स्थिति हो गई कि नई प्रदेश कमेटी में भी उन्हें तरजीह नहीं दी गई. नई प्रदेश कमेटी का खाका तैयार करने वाली तिकड़ी ने उन्हें भी गच्चा मार दिया. जबकि प्रदीप वर्मा और गणेश मिश्र दोनों ही यूपी के एक ही जिले से आते हैं. फिर गणेश मिश्र साइडलाइन कर दिए गए.

