रांची: भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने पंचायत सचिव परीक्षा की अंतिम मेधा सूची को अकारण लटकाये जाने की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए युवाओं के भविष्य को बर्बाद होने से बचाने की अपील की है.
बाबूलाल मरांडी ने आज मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा प्रकाशित के तहत परीक्षा ली गयी, लेकिन पंचायत सचिव परीक्षा का अंतिम मेधा सूची को राज्य सरकार द्वारा अकारण लटकाए जाने के कारण 3088 अभ्यर्थियों का भविष्य बर्बाद हो रहा है.
उन्होंने कहा कि इस मामले में विभिन्न चरणों में लिखित और जांच परीक्षा पूर्ण की जा चुकी है. सफल अभ्यर्थियों का सितम्बर 2019 में प्रमाण-पत्रों की जांच की जा चुकी है.
इसके पूर्व परीक्षाफल प्रकाशित करने को लेकर कई जनप्रतिनिधियों ने आग्रह-पत्र लिखा है. स्वयं अभ्यर्थियों का प्रतिनिधित्वमंडल भी कई दफा मुलाकात कर लिखित आवेदन सौंपकर इस समस्या के तत्काल समाधान की गुहार लगा चुका है.
बावजूद पंचायत सचिव का अंतिम मेधा सूची प्रकाशित नहीं होना दुखद है. इससे अभ्यर्थियों में घोर निराशा व हताशा व्याप्त है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस मामले में उन्हें नहीं लगता कि बहुत अधिक कुछ आपसे कहने की आवश्यकता है.
वे इस मामले से पूरी तरह खुद अवगत हैं. नेता-प्रतिपक्ष रहते हुए आपने इस मामले में ठोस आश्वासन भी दिया है. परंतु जब कई जनप्रतिनिधियों के द्वारा पत्र लिखने के बावजूद आपके स्तर से सिवाय टालमटोल के कोई सुगबुगाहट देखने को नहीं मिली तो उन्हें लगा कि अब इस पर देर करना मुनासिब नहीं है. एक जनप्रतिनिधि होने के नाते इस ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना उनका दायित्व बन जाता है.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार की लेटलतीफी से इससे जुड़े लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है शायद कभी सरकार ने इस ओर सोचा भी नहीं होगा.
उन्होंने बताया कि अन्य रिक्तियों दारोगा, आईआरबी, रेडियो ऑपरेटर, वायरलेस दारोगा आदि का विज्ञापन, पंचायत सचिव के बाद का होने के बावजूद इन सभी की नियुक्ति की जा चुकी है और वे सभी कार्यरत भी हैं.
विज्ञापन राजस्व कर्मचारी की भी नियुक्ति हो चुकी है और वे डेढ़ साल से अधिक समय से नौकरी भी कर रहे हैं. जबकि पंचायत सचिव व राजस्व कर्मचारी का नियमावली एक बताया जा रहा है.

