नई दिल्ली: कोरोना वायरस का कहर लोगों पर लगातार जारी है. बात सिर्फ बीमारी की वजह से लोगों को हो रही पीड़ा की नहीं है, भारत में यह बीमारी फिलहाल दुनिया के बाकी हिस्सों जितने विकराल रूप में नहीं है.
लेकिन संक्रमण को रोकने के लिए 21 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बीच लोगों को कई तरह की परेशानियों से दो- चार होना पड़ रहा है.
मजदूरों के दूर दूर से पैदल घरों तक बिना किसी खाने पीने की व्यवस्था के लौटने की खबरें सामने आ रही हैं.
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इस बीच कई घटनाएं बेहद मार्मिक भी हैं. बिना किसी खास काम के घरों की ओर से लौट रहे लोग तो देर सबेर अपनी गंतव्य तक पहुंच जाएंगे. लेकिन कुछ लोग ऐसे थे जिनका घर पर पहुंचना बहुत जरूरी था लेकिन लॉकडाउन उनके रास्ते का रोड़ा बन गया.
कुछ ऐसी ही कहानी है मुरकीम की जिसकी मां की मौत बीती 25 मार्च को बनारस में हो चुकी है लेकिन वह अभी घर पहुंचने की ओर रास्ते में ही है.
मिली जानकारी के अनुसार, मुरकीम नाम का एक युवक अपने दो दोस्तों, विवेक और प्रवीण के साथ रायपुर से यूपी के वाराणसी की ओर पैदल यात्रा कर रहा है. उसकी मां की मौत 25 मार्च को वाराणसी में हुआ था. वे 3 दिन में रायपुर से अभी कोरिया जिले के बैकुंठपुर पहुंचे हैं.
मुरकीम के एक दोस्त ने इस बारे में बात करते हुए कहा, ‘हम लगभग 20 किलोमीटर तक चले और 2-3 लोगों से हमने रास्ते में लिफ्ट भी ली. जब हम यहां बैकुंठपुर पहुंचे तो मेडिकल शॉप के एक मालिक ने हमारी मदद की.’

