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हेमंत सरकार झारखंड के आदिवासी-मूलवासियों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है: भाजपा

by bnnbharat.com
September 8, 2020
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हेमंत सरकार झारखंड के आदिवासी-मूलवासियों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है: भाजपा
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मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध करने पर भाजपा का पलटवार

रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कल राष्ट्रपति की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध कर के इस सरकार के आदिवासी मूलवासी विरोधी चेहरे को स्पष्ट दिखा दिया है.

प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषा में प्रारंभिक पढ़ाई की नीति पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हुए क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की अनुपलब्धता की तथ्यहीन बात कही है. प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए था क्योंकि इस से राज्य में नागपुरी, संताली, मुंडारी,कुंड़ुख़,खोरठा,हो आदि क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं को प्रोत्साहन मिलता.

इन भाषाओं का साहित्य भी समृद्ध है और पुस्तकें भी अच्छी संख्या में उपलब्ध है. प्रतुल ने कहा कहा कि वर्तमान में इस राज्य में क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री लिया हुए 17000 से ज़्यादा युवा मौजूद हैं. इसके बावजूद हेमंत सोरेन इन भाषाओं में शिक्षकों की कमी की बात उठाकर हज़ारों आदिवासी मूलवासी युवाओं को नौकरी से वंचित करना चाहते है.

उन्होंने कहा कि भजपा सरकार स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिये कृत संकल्प है. अटल जी की सरकार ने संथाली भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल किया. रेलवे द्वारा संथाली भाषा मे उद्घोषणा भी भाजपा सरकार की ही देन है. प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार ने कुडुख,मुंडारी,हो को भी 8वी अनुसूची में शामिल करने की पहल की थी जिसे हेमंत सरकार को आगे बढ़ना चाहिये.

प्रतुल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति झारखंड के जनजातीय समुदाय के हित में भी है क्योंकि अनेक बार इस समुदाय के लोग पढ़ाई को बीच में भी छोड़ देते हैं. अब वह जिस स्तर पर पढ़ाई छोड़ेंगे उसके हिसाब से उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री दिया जाएगा और वह जब भी अपनी पढ़ाई से वापस जुड़ना चाहे तो समय की पाबंदी नही रहेगी. लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां के जनजाति और मूलवासी समाज को वोट बैंक से ज्यादा कुछ नहीं समझा.

प्रतुल ने मुख्यमंत्री के इस आरोप को भी निराधार और बेबुनियाद बताया जिसमें उन्होंने कहा था की शिक्षा नीति को बिना स्टेकहोल्डर ,छात्रों, शिक्षाविदों से बातचीत किए हुए लागू किया गया है. प्रतुल ने कहा कि नई शिक्षा नीति पर कार्य जनवरी 2015 से ही शुरू हो गया था. ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरकार ने सुझाव मांगे थे.

इन सुझावों पर विचार करने के लिए पूर्व कैबिनेट सचिव बालासुब्रमण्यम की अध्यक्षता में बनी कमिटी ने अपनी रिपोर्ट मई 2016 को ही सौंप दी थी. उसके बाद पदम विभूषण कस्तूरीरंगन जी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनी. उसी ने गहराई से सभी पहलुओं पर विचार विमर्श करके नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट सरकार को सौंपा जिसे कैबिनेट ने अपनी मंजूरी थी.

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री यह कह कर जनता को दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा का निजीकरण होगा. प्रतुल ने कहा कि विदेशी विश्वविद्यालयों के आने से विदेश जाकर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या जबरदस्त तरीके से घटेगी जिससे देश को विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी. जितने भी निजी विश्वविद्यालय या इंस्टिट्यूट आएंगे वे भारत सरकार के हायर एजुकेशन कमिशन ऑफ इंडिया के अंतर्गत कार्य करेंगे. इनके फीस की भी रेगुलेशन यही संस्था करेगी. निजी संस्थानों को नो प्रॉफिट नो लॉस के सिद्धांत पर चलना होगा और अगर किसी वर्ष कोई प्रॉफिट आता है तो उसे शिक्षा के क्षेत्र में ही वापस निवेश करना होगा. इन निजी संस्थानों को 20% छात्रों को बिल्कुल मुफ्त में पढ़ाना होगा और 30% छात्रों को बड़ी स्कॉलरशिप देनी होगी. ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री झारखंड के छात्रों को अच्छी शैक्षणिक डिग्रियां लेना देना नहीं चाहते.

प्रतुल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह आरोप भी हास्यास्पद है कि इस शिक्षा नीति से रोजगार को बढ़ावा नहीं मिलेगा.यह पहली बार हुआ है कि छठी कक्षा से वोकेशनल कोर्स की शुरुआत होगी जो पूर्णता रोजगार पर केंद्रित होगा.

प्रतुल ने कहा कि इस शिक्षा नीति के जरिये वर्ष 2030 तक स्कूलों में 100% बच्चों का दाखिला का लक्ष्य रखा गया है.ओपन स्कूलिंग के जरिए दो करोड़ बच्चों को शिक्षा में वापस लाने का लक्ष्य हस. वर्तमान में हायर एजुकेशन में 26% के दाखिले को 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. शिक्षा के क्षेत्र में खर्च को जीडीपी के वर्तमान 4.43% से बढ़ा कर 6% करने का लक्ष्य रखा गया है.

बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र ने ‘जेंडर इंडक्शन फंड’ के गठन का निर्णय लिया है. फिर ऐसी शिक्षा नीति का विरोध करके हेमंत सोरेन झारखंड के आम जनता के हितों का विरोध कर रहे हैं जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रेस वार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक भी उपस्थित थे.

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