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हेमंत सरकार का भ्रष्टाचार पर खंजर, निशाने पर कई IAS और IFS

by bnnbharat.com
January 12, 2020
in Uncategorized
हेमंत सरकार का भ्रष्टाचार पर खंजर, निशाने पर कई IAS और IFS

हेमंत सरकार का भ्रष्टाचार पर खंजर, निशाने पर कई IAS और IFS

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खास बातें

  • भारतीय वन सेवा के कई अफसरों पर गिर सकती है गाज, खुल सकती हैं कई फाइलें

  • सरकार ने माना है कि खान और वाणिज्यकर विभाग में बरती गई हैं कई अनियमिताएं

रांचीः हेमंत सरकार ने भ्रष्टाचार के कई मामलों को संज्ञान में लिया है. खुद सीएम हेमंत सोरेन स्वीकार कर चुके हैं कि खान और वाणिज्य विभाग ने भारी पैमाने पर अनियमितता बरती है. इन विभागों में अनियमितता दूर की जाए तो 15 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी, जिसे कल्याणकारी कामों में खर्च किया जा सकेगा. मोमेंटम झारखंड के अलावा भ्रष्टाचार के कई मामले भी सरकार के संज्ञान में आ चुके हैं, कई आईएएस और आईएफएस निशाने पर हैं.

 निगरानी की जद में आ चुके हैं आईएफएस अफसर

निगरानी की जद में कई आईएफएस अफसर भी आ चुके हैं. मामला लोकायुक्त तक पहुंचा. लोकायुक्त ने निगरानी जांच का आदेश दिया. लेकिन पूर्व की सरकार में विभाग से निगरानी जांच की स्वीकृति नहीं मिली. फिर लोकायुक्त ने अपने स्तर से जांच करने का निर्णय लिया. मामले की जांच चल रही है. इसमें पीसीसीएफ से लेकर सीएफ रैंक तक के अफसरों पर आरोप है. खेल गांव में आयोजित विश्व पर्यावरण दिवस (पांच जून) को आईएफएस अफसरों ने कार्यक्रम स्थल को 6.60 लाख खर्च कर बैलून से सजाया. यही नहीं 20000 खर्च कर गैस बैलून उड़ाया. इस आयोजन में सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग हुआ.

अफसरों ने सिर्फ चाय और बिस्किट में खर्च कर दिए 2.50 लाख

खेल गांव में आयोजित विश्व पर्यावरण दिवस में ब्रेक फास्ट, लंच और डीनर के मद में 34,30,950 रुपये खर्च कर दिये गये. अफसरों ने सिर्फ चाय और बिस्किट में लगभग ढ़ाई लाख रुपये खर्च किये. कार्यक्रम के आयोजन से पहले 21 मई को विभिन्न उद्योगों एवं प्रयोक्ता अभिकरणों के प्रतिनिधियों को बुलाया और प्रस्तावित आइटमों पर संभावित खर्च वहन करने के लिए कहा गया. कार्यक्रम में होने वाले खर्च का कोई प्राक्कलन भी नहीं बना था. और न ही कोई योजना सरकार से स्वीकृत करायी गयी थी. आईएफएस अफसरों ने बिना किसी प्राक्कलन के स्वयं ही खर्च करने का निर्णय ले लिया और कार्यवाही में राशि अंकित कर दी.

वरीए आईएफएस अफसर ने की है शिकायत

राज्य के वरीय आईएफएस अफसर ने भी वन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदू शेखर चतुर्वेदी को पत्र लिख कर शिकायत की है कि पीसीसीएफ संजय कुमार आचार संहिता के दौरान ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए. यही नहीं पीसीसीएफ ने जूनियर को पीसीसीएफ का चार्ज भी दे दिया. सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है. फिलहाल अब तक पीसीसीएफ के लिए डीपीसी नहीं हो पाई है.

वाणिज्यकर और खान विभाग के अफसर हैं निशाने पर

वाणिज्यकर और खान विभाग के भी अफसर निशाने पर हैं. खुद सीएम ने जब इन दोनों विभागों की नब्ज टटोली तो पता चला कि इन दोनों विभागों में काफी अनियमितताएं बरती गई हैं. इसके अलावा उद्योग विभाग पर भी सरकार की नजर है.

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