रांची: सुविख्यात झारखंड आंदोलनकारी तथा पूर्व भाजपा प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर ने प्रवासी मजदूरों तथा छात्रों को वापस झारखंड लाने की सफल पहल के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बधाई दी है. निश्चित तौर पर यह हेमंत सोरेन के प्रयास का नतीजा है कि रेल मंत्रालय ने शुरुआती आठ ‘श्रमिक स्पेशल’ में से चार ट्रेनें झारखंड के लिए चलाईं.
उन्होंने कहा कि इस विकट परिस्थिति में भाजपा को इस मामले में श्रेय लेने की राजनीति नहीं करनी चाहिए और दलगत सीमा से ऊपर उठकर मुख्यमंत्री का उत्साहवर्धन होना चाहिए.
प्रभाकर ने कहा कि वह हेमंत सोरेन के आलोचक रहे हैं, लेकिन प्रवासियों के मामले में पहल कर मुख्यमंत्री ने निश्चित तौर पर देश भर में बाजी मार ली है. प्रभाकर ने कहा कि लॉकडाउन में केंद्र के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए हेमंत सोरेन ने ही बार-बार प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री से ट्रेनों के परिचालन का अनुरोध किया था, जबकि बिहार जैसे राज्य इसके पक्ष में नहीं थे. उनकी पहल का प्रमाण इस तथ्य से मिल जाता है कि शुरूआती आठ ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों में से चार झारखंड के लिए हैं.
तेलंगाना व केरल से मजदूरों को लेकर एक-एक और कोटा से छात्रों को लेकर दो ट्रेनें चलीं. शेष चार में उत्तरप्रदेश, बिहार, ओड़िसा तथा मध्यप्रदेश के लिए एक-एक ट्रेनें चली हैं.
प्रभाकर ने कहा कि गृह एवं रेल मंत्रालयों द्वारा जारी दिशा निर्देशों से भी स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित राज्य सरकार के अनुरोध तथा किराए के एकमुश्त भुगतान के आधार पर ही ये ट्रेनें चलाई जा रही हैं.
राज्य सरकार ही ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों के परिचालन के लिए सभी प्रवासियों के स्लीपर क्लास के भाड़े तथा ₹50 अतिरिक्त का भुगतान कर रही हैं, जिसमें ₹30 सुपरफास्ट चार्ज एवं ₹20 भोजन-पानी शुक्ल के रूप में शामिल है.
प्रभाकर ने कहा कि हिंदपीढ़ी के कोरोना संक्रमित क्षेत्र में सीआरपीएफ की तैनाती कर भी मुख्यमंत्री ने दूरदर्शिता का परिचय दिया है. राज्य सरकार की सक्रियता से राज्य में स्थिति नियंत्रण में दिखती है.

