रांची: राजधानी के लिए इन दिनों हाईटेक अपराधी चुनौती बनते जा रहे हैं. एसएसपी सुरेन्द्र झा ने साइबर सेल को अलर्ट करते हुए निर्देश जारी किया है कि ऐसे मामलों पर तेज कार्रवाई करते हुए लगाम लगाने का प्रयास करें. रांची पुलिस इन दिनों हाईटेक अपराधियों से परेशान है. कई आपराधिक मामलों में पुलिस के हाथ खाली हैं. वर्चुअल नंबर और इंटरनेट कॉल के जरिए अपराधी इन दिनों रंगदारी और धमकी दे रहे हैं.
अपराधियों और नक्सलियों के हाईटेक होने की वजह से पुलिस की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं. वर्चुअल नंबर और इंटरनेट कॉल के जरिए रंगदारी की घटनाएं राजधानी रांची में लगातार बढ़ रही हैं. इस वजह से पुलिस तो परेशान है
अपराधी-नक्सली इन दिनों इंटरनेट कॉल का इस्तेमाल रंगदारी मांगने और धमकी देने के लिए कर रहे हैं. तकनीक की जानकारी रखने वाले अपराधी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इंटरनेट कालिंग कर रहे हैं. फेक नंबर से आने वाली कॉल को ट्रैक कर पाना आसान नहीं होता है. इंटरनेट से आने वाली कॉल रांची पुलिस के लिए आफत बन रही है. कॉल करने वाले इंटरनेट के जरिए फोन कर रहे हैं. इस वजह से आईपी एड्रेस ट्रेस करने में समय लगता है. इंटरनेट के जरिए कॉल की सेवा देने वाली ज्यादातर कंपनियों के ऑफिस विदेशों में हैं. फर्जी आईडी के जरिए रजिस्ट्रेशन कराकर किसी सॉफ्टवेयर से कॉल करना आसान है. हाल के दिनों में हाईटेक होते बदमाशों ने पुलिस की नाक में दम करना कर दिया है.
ज्यादातर मामलों में सर्विलांस के जरिए शातिरों तक पहुंचने वाली पुलिस को छकाने के लिए बदमाश इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. पहले से ही व्हाट्सअप कॉल से परेशान पुलिस के लिए इंटरनेट के वर्चुअल नंबर का पता लगाने चुनौती बन गया है. सीएम हेमंत सोरेन को मेल के माध्यम से धमकी देने वाले को पुलिस ट्रेस नहीं कर पा रही. वहीं, पूर्व डीप्टी सीएम सुदेश महतो को धमकी देने के मामले में पुलिस की कार्रवाई ठप है. इंटरनेट कॉल से धमकाने वाले तक पुलिस नहीं पहुंच सकी. हाल के दिनों में कुछ मामलों में पुलिस ने कई अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा है, लेकिन इस गिरोह तक पुलिस को पहुंचने में पसीने छूट रहे हैं.
इंटरनेट के जरिए किए जाने वाले कॉल में वर्चुअल नंबर का यूज किया जाता है. इसे आसानी से ट्रेस नहीं किया जा सकता है. पूर्व में सामने आई धमकियों में किसी फोन करने वाले का पता नहीं लग सका है. टेक्नीकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे नंबरों से मैसेज और वीडियो भेजने की सुविधा होती है. इसका इस्तेमाल ज्यादातर साइबर क्रिमिनल्स करते हैं. बिना सिम कार्ड इस्तेमाल के होने वाली कॉल में मोबाइल हैंडसेट की जरूरत नहीं पड़ती. सिमकार्ड का इस्तेमाल न होने से पुलिस टावर लोकेशन सहित अन्य जानकारी ट्रेस करने में नाकाम रह जाती है. इंटरनेट से कुछ सॉफ्टवेयर के जरिए वर्चुअल नंबर जेनरेट करते हैं. इसका इस्तेमाल इंटरनेट कॉलिंग, व्हाट्सअप सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मैसेज भेजने में होता है. राजधानी रांची में कई लोगों को धमकियां मिली हैं, जिनमें इंटरनेट से आई कॉल को पुलिस ट्रेस करने में नाकाम रही.
संदिग्ध नंबर न करें रिसीव
इंटरनेट से कॉल करने पर तीन-चार अंकों का फेक नंबर जेनरेट होता है. फोन रिसीव करने वाले के मोबाइल पर यही नंबर शो करता है. इस नंबर के आधार पर कॉलर की सूचना जुटा पाना बेहद कठिन होता है. ऐसे में जरूरी है कि जो नंबर संदिग्ध दिखे उसे आप रिसीव ही न करें.

