रांची. कोरोना संक्रमण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के तमाम गाइडलाइन के बीच झारखंड की राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में रंगो के त्योहार होली की खुमारी चरम पर दिखी. होली को लेकर बच्चों और युवाओं में होली को लेकर खासा उत्साह दिखा. लेकिन सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए सार्वजनिक रूप से होली मनाने की जगह लोगों ने अपने परिवार और आस पड़ोस के लोगों के साथ होली मनायी. सुबह से ही बच्चों और युवाओं की टोली होली मनाते दिखे. विशेष रूप से युवकों ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाया.
देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम मंदिर में बाबा भेलेनाथ पर रंग-अबीर चढ़ाने के बाद होली मनायी. इधर, सरायकेला में ब्रज की होली जैसी नजारा देखने को मिला. भगवान श्री कृष्ण दोल पर सवार होकर लोगों के दरवाजे पर पहुंचे और भक्तों के साथ होली खेली. यह सांस्कृतिक परंपरा प्राचीन है. इस वर्ष भी भगवान श्री कृष्ण की अष्टधातु से निर्मित मूर्ति को दोल पर विराजमान कर भक्तों द्वारा कंधे पर उठाकर नगर परिक्रमा कराया गया. आध्यात्मिक उत्थान जगन्नाथ मंडली के संयोजक ज्योति लाल साहू ने बताया कि इस आयोजन को वे 1980 से करते आ रहे हैं, जहां भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के दरवाजे पर पहुंच कर होली खेलते हैं.
पूर्वी सिंहभूम जिले में होली का त्योहार हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जा रहा है. जिला प्रशासन के निर्देश के अनुसार अपने घरों में ही लोग होली खेल रहे हैं. दिन में सड़के विरान रहीं. जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के निवास स्थान बिष्टुपुर में होली बड़े उत्साह उमंग और अनुशासित ढंग से मनाया गया.
राज्य के अन्य सभी जिलों में भी सरकारी निर्देशों का अनुपालन करते हुए रंगों का त्योहार होली मनाया जा रहा है. लोगों ने भीड़ से परहेज करते हुए अपने अपने घरों में होली मनाना बेहतर समझा.
खूंटी जिले के शहरी इलाकों में जिला प्रशासन के आदेश के बाद लोग अपने अपने घरों में होली मनाते देखे गए. महिलाओं ने भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया और घर में दीया जलाकर विशेष पूजा की. यहां होली के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को पलाश और सखुवा फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है. सरकारी गाइडलाइन के कारण सड़कों में भीड़ नहीं रही. बच्चों के साथ साथ बड़ों ने भी छोटे छोटे समूह में होली मनायी.

