-झारखंड के हेवीवेट पत्रकारों की भी हैं भरमार
– सूचना आयुक्त के लिए 354 और मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 63 लोगों ने दिया है आवेदन
– कुर्सी के लिए एक्शन, इमोशन, ड्रामा और क्लाइमेस सब कुछ
रांची: सूचना आयुक्त की कुर्सी पर ब्यूरोक्रेट्स की भी नजरें हैं. इस कुर्सी पर बैठने के लिए एक दर्जन से अधिक पूर्व IAS अफसरों ने इच्छा जताई है. मुख्य सूचना आयुक्त सहित छह पद रिक्त पड़े हैं. जानकारी के अनुसार, पूर्व सीएस डॉ डीके तिवारी भी रेस में बने हुए हैं. सूचना आयुक्त के लिए पूर्व IAS, आईपीएस, पत्रकार, नेता सहित 353 लोगों ने आवेदन दिया है. वहीं मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 63 लोगों ने आवेदन दिया है. सरकार चाहे तो और खाली पड़े छह पदों पर सूचना आयुक्त की नियुक्ति कर सकती है. गुरुवार को चयन समिति की बैठक भी होगी.
मुख्य सूचना आयुक्त के लिए तीन पूर्व सीएस भी रेस में
मुख्य सूचना आयुक्त के लिए जिन 63 लोगों ने आवेदन दिया है, उसमें तीन पूर्व मुख्य सचिव रैंक के अफसर भी शामिल हैं. इसमें पूर्व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, डॉ डीके तिवारी के साथ सीएस रैंक के अफसर बीके त्रिपाठी भी शामिल हैं.
इसके अलावा पीके जाजोरिया, अनिल कुमार सिंह, पीसीसीएफ एलआर सिंह, आईएफएस कीर्ति सिंह, भाजपा के पूर्व प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर के नाम भी शामिल हैं.
सबसे विचित्र स्थिति बीजेपी नेता की
इसमें सबसे विचित्र स्थिति बीजेपी नेता की है. सूचना आयुक्त के लिए बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने भी आवेदन किया है. वहीं बीजेपी के ही पूर्व प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर ने मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त दोनों पदों के लिए आवेदन दिया है.
खास बात तो यह है कि चयन समिति की बैठक में नेता प्रतिपक्ष का शामिल होना अनिवार्य है. नेता प्रतिपक्ष की राय भी अहम होती है. हालांकि विधानसभा में बीजेपी के बाबूलाल मरांडी को अब तक नेता प्रतिपक्ष की मान्यता ही नहीं मिली है.
नामी गिरामी के अखबारों के पत्रकार भी जुगत में
सूचना आयुक्त के लिए नामी गिरामी अखबारों के पत्रकार भी अपनी जुगत लगाए हुए हैं. इसमें कई संपादक रैंक के भी हैं. कई उस रैंक से रिटायर भी हो गए हैं, लेकिन यहां भी एक्शन, इमोशन, ड्रामा और क्लाइमेक्स है. देखना यह है कि सीमित छह पद में किसे तवज्जों मिलती है.
417 लोगों ने दिया है आवेदन
अब तक कुल 417 लोगों ने आवेदन दिया है. सूचना आयुक्त के लिए 354 और मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 63 लोगों ने आवेदन किया है. इसमें हर कटेगरी के लोग शामिल हैं. इसलिए सूचना आयुक्त की कुर्सी को हॉट केक माना जा रहा है.

