नीता शेखर ,
” जिंदगी का रुख कब कहां और कैसे बदल जाए कोई नहीं जानता “
जब 2013 में केदारनाथ में हादसा हुआ था उसमें कितने ही घर उजड़ गए, कितने ही लोग बिछड़ गए थे, किसी का पता भी नहीं चला.
आलोक के साथ भी ऐसा ही हुआ उसने कभी इतनी लंबी यात्रा नहीं की थी. वह और उसकी पत्नी शोभा भी उसी दिन केदारनाथ पहुंचे थे वे अभी कुछ समझ पाते कि उनके साथ ऐसी घटना हो गई जब आलोक को होश आया तो उसने अपने आप को एक टीले के नीचे पाया आसपास लाश ही लाश बिखरे पड़े थे. उसकी पत्नी भी कहीं नजर नहीं आ रही थी. उसने काफी तलाश की पर वह कहीं नहीं मिली. उसने पुलिस और अस्पताल वालों को भी बताया, मगर कहीं से कोई खबर नहीं मिली. महीनों तक खोजने के बाद वह वापस आ गया.
इतना बड़ा हादसा हो गया था कोई सोचा भी नहीं था. अभी चार साल पहले ही तो उनकी शादी हुई थी. आलोक काफी उदास रहने लगा वह किसी से भी बातचीत नहीं करता. अपने आपको उसने कमरे में बंद कर लिया था उस हादसे से उबर नहीं पा रहा था. आलोक बैंक मैनेजर था, वह दिन भर काम करता था और चुपचाप आकर अकेले अपने कमरे में घुस जाए करता था. अब वह पूरे महीने काम करता और आखिरी सप्ताह में वह शोभा को खोजने जाता.
उसने हरिद्वार, ऋषिकेश, केदारनाथ उसके आसपास के सभी जगहों पर सुधा की तलाश की पर वह कहीं नहीं मिली. साल गुजर गया शोभा कहीं नहीं मिली, फिर भी आलोक का अपना एक ही मकसद था शोभा को खोजना उसे बार-बार लगता शोभा कहीं तो है उसे विश्वास नहीं होता था कि शोभा नहीं है, उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी उसकी खोज जारी रखी. एक दिन वह शोभा को खोजते खोजते देहरादून पहुंच गया.
उसे कुछ पता नहीं चल रहा था वह वापस आने की सोच ही रहा था कि उसको कुछ सुनाई दिया कुछ लोग बात कर रहे थे किसी औरत के बारे में कह रहे थे. एक औरत ना जाने कहां से आई है उसको कुछ भी याद नहीं है. बहुत दिनों तक अस्पताल में कोमा में थी फिर भगवान की मर्जी देखो होश तो आ गया पर उसे कुछ भी याद नहीं.
कहा कि यह कौन है इतना सुनकर आलोक के कान खड़े हो गये उसने उन लोगों से मंदिर का पता पूछा और मंदिर की तरफ चल पड़ा. मंदिर में प्रवेश किया उसको तो खुशी से चिल्ला उठा वह शोभा ही थी, पर शोभा ने उसे पहचाना नहीं क्योंकि वह तो सब कुछ भूल चुकी थी, तुरंत आलोक ने पुलिस को अपनी पत्नी का फोटो पासपोर्ट के पहचान के तौर पर पेश किया.
पुलिस ने उसे ले जाने की इजाजत दे दी, उसकी शोभा मिल गई थी पर वो कुछ बोल नहीं पाती, बस उसकी आंखें शुन्य में कुछ खोज रही थी. आज उसकी खोज खत्म हो गई थी पर आगे की जिंदगी क्या होगी उसके बारे में सोच रहा था. आखिर भगवान क्या चाहते हैं उसके साथ ऐसा कैसे हो गया पर वह सबसे ज्यादा खुश था कि उसकी पत्नी मिल गई थी.
उसकी सालों की मेहनत का फल आज मिल गया था उसने सोचा जो हुआ सो हुआ पर अब मैं कभी भी शोभा को अकेला नहीं छोडूंगा. फिर उसने डॉक्टर की खोज शुरू की उसे पता चला बेंगलुरु में अच्छे डॉक्टर है फिर वह शोभा को लेकर बेंगलुरु चला गया, वहां पर उसने उसे अस्पताल में भर्ती कर दिया डॉक्टर ने कहा हादसे की वजह से इनके ऊपर ऐसा प्रभाव पड़ा है कि यह सब कुछ भूल चुकी है.
आलोक ने हिम्मत नहीं हारी उसने शोभा का इलाज जारी रखा. आज बहुत दिनों बाद शोभा जोरो से चिल्लाई. आलोक ने तुरंत डॉक्टर को खबर किया, उसने आलोक को बताया थोड़े दिनों में ठीक हो जाएंगी लेकिन आपको ध्यान रखना. होगा कि पुरानी बातों को याद ना दिलाया जाए खासकर केदारनाथ की घटना को तो बिल्कुल भी याद नहीं दिलाना है.
शोभा धीरे धीरे ठीक होने लगी थी, उसकी याददाश्त भी धीरे-धीरे वापस आ रही थी, एक दिन ऐसा आया जब उसको सारी बातें याद आ गई. उस दिन उसने आलोक को भी पहचान लिया आलोक खुशी से चिल्ला पड़ा. मगर सुधा भूल चुकी थी उस केदारनाथ की घटना को उसको बिल्कुल भी याद नहीं था क्या हुआ क्या नहीं. आलोक ने भी ज्यादा पूछने की कोशिश नहीं की उसने सोचा मेरी जिंदगी मुझे वापस मिल गई इससे ज्यादा मुझे क्या चाहिए.
कुछ घटनाओं को भूल जाना ही अच्छा होता है. ऐसे पति भी विरले होते हैं. जिन्हें अपने आप और भगवान पर विश्वास होता है आज उसका विश्वास ही था जो सुधा को वापस ले आया था.


